पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी अवैध : झारखंड हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल मैरिज एक्ट के बाद धार्मिक कानून नहीं चलेगा

Rupa Kumari | November 10, 2025 | 03:59 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाते हुए कहा है कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह करने के बाद कोई व्यक्ति धार्मिक या निजी कानून का सहारा लेकर दूसरी शादी नहीं कर सकता। यह फैसला धनबाद के पैथॉलॉजिस्ट मोहम्मद अकील आलम के मामले में आया, जिन्होंने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी की थी। अकील आलम ने 4 अगस्त 2015 को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की। कुछ महीनों बाद उनकी पत्नी घर छोड़कर देवघर चली गई। अकील ने दावा किया कि पत्नी बिना कारण चली गई और कई बार बुलाने के बावजूद वापस नहीं लौटी। उन्होंने देवघर फैमिली कोर्ट में वैवाहिक अधिकारों की बहाली की याचिका दायर की।

पत्नी की दलील

पत्नी ने अदालत में बताया कि अकील पहले से शादीशुदा थे और उनकी पहली पत्नी से दो बेटियां हैं। आरोप लगाया कि अकील ने पिता से संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया और मना करने पर मारपीट की। सुनवाई के दौरान अकील ने खुद स्वीकार किया कि उनकी पहली पत्नी जीवित हैं। देवघर फैमिली कोर्ट ने दूसरी शादी को अवैध घोषित किया।

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हाई कोर्ट का फैसला

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 4(ए) के अनुसार, विवाह वैध तभी होगा जब शादी के समय कोई पहले से जीवित जीवनसाथी न रखता हो। न्यायालय ने स्पष्ट किया, स्पेशल मैरिज एक्ट एक ‘नॉन ऑब्स्टांटे क्लॉज’ के तहत बना कानून है, जो किसी भी निजी या धार्मिक कानून से ऊपर है।

महत्त्व और प्रभाव

इस निर्णय को देशभर में समान नागरिक अधिकारों के दृष्टिकोण से मिसाल माना जा रहा है। कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होने वाले विवाह में पहले से मौजूद जीवनसाथी को छिपाना अपराध है और दूसरी शादी अवैध मानी जाएगी।

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