नालंदा के डीएम को राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी सम्मानित, मिला राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024, 25 लाख की राशि भी शामिल

Meenu | November 18, 2025 | 10:27 AM IST

Samachar Post डेस्क,बिहार :जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए नालंदा जिले को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। नालंदा को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 के लिए चुना गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में यह सम्मान जिले को प्रदान करेंगी।जिलाधिकारी कुंदन कुमार समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुँच चुके हैं। पुरस्कार में 25 लाख रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।

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जल संचय–जन भागीदारी 1.0 से चमका नालंदा

नालंदा को यह सम्मान उसकी अनोखी पहल JSJB 1.0 की वजह से मिला है। इस अभियान के तहत जिले ने 12,051 जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ तैयार कीं जबकि केंद्र सरकार ने पूरे देश के लिए 10,000 संरचनाओं का लक्ष्य तय किया था। यानी नालंदा ने अकेले ही राष्ट्रीय लक्ष्य को पीछे छोड़ दिया।

मनरेगा बना आधार, रोजगार भी बढ़ा और जल संरचनाएँ भी

इस सफलता की नींव मनरेगा (MGNREGA) ने रखी। अभियान के दौरान चेक डैम, तालाब सुधार, आहर-पइन प्रणाली पुनर्जीवन, रिचार्ज पिट, सोख्ता और ड्रेनेज सुधार जैसे काम हुए। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला और जिले में टिकाऊ जल संरचनाएँ तैयार हुईं। खास बात नालंदा की पारंपरिक आहर–पइन सिंचाई प्रणाली को फिर से जीवंत करने में मनरेगा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्राम पंचायतें और निकाय भी आगे आए

ग्राम पंचायतों ने स्थान चयन से लेकर जन-जागरूकता और निगरानी तक जिम्मेदारी संभाली। स्थानीय लोगों ने कुओं, तालाबों और पुराने जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में सक्रिय सहभागिता दिखाई। शहरी इलाकों में नगर निकायों ने ड्रेनेज सुधार, तालाबों के पुनर्जीवन, जलभराव नियंत्रण और वर्षा जल संचयन पर खास फोकस किया। कैच द रेन अभियान को भी इसमें जोड़ा गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें।

जल–जीवन–हरियाली अभियान बना गेमचेंजर

नालंदा की इस उपलब्धि में जल–जीवन–हरियाली अभियान की भी अहम भूमिका रही। वृक्षारोपण, जल निकाय संरक्षण, सिंचाई स्रोतों का पुनर्जीवन, जल-सम्मेलन, जागरण रैलियाँ और हरित संदेश यात्राओं ने जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन का रूप दिया। इन प्रयासों का परिणाम अब स्पष्ट है जिले में भू-जल स्तर बढ़ा है, सिंचाई क्षमता में सुधार है, लोगों की सीधी भागीदारी ने इसे सामाजिक आंदोलन बनाया है।

नालंदा बना राष्ट्रीय मॉडल

आज नालंदा का JSJB 1.0 मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण है। मनरेगा की मजबूती, पंचायतों की सक्रियता, नगर निकायों का योगदान और जल–जीवन–हरियाली अभियान इन सभी ने मिलकर नालंदा को राष्ट्रीय गौरव दिलाया है।

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