Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में सरकारी धन के हिसाब-किताब और वित्तीय जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में गबन, वित्तीय दुरुपयोग, वसूली योग्य राशि, असमायोजित अग्रिम और अंकेक्षण आपत्तियों समेत विभिन्न वित्तीय मामलों में कुल 18,060 करोड़ रुपये लंबित बताए गए हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि से जुड़े इन मामलों का निपटारा नहीं होने पर विभागों की कार्यप्रणाली और वित्तीय निगरानी को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 22 अक्टूबर को विभागीय सचिवों की बैठक बुलाई है। सरकार का जोर लंबित मामलों की समीक्षा करने और सरकारी राशि का हिसाब स्पष्ट करने पर रहेगा।
22 अक्टूबर को विभागीय सचिवों के साथ बैठक
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लंबित वित्तीय मामलों की समीक्षा के लिए विभागीय सचिवों की बैठक निर्धारित की है। इससे पहले भी दो बार बैठक प्रस्तावित हुई थी, लेकिन उनका आयोजन नहीं हो सका। अब सरकार लंबित राशि और अंकेक्षण आपत्तियों के निपटारे की दिशा में कार्रवाई करना चाहती है। वर्ष 2023 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने भी इस मामले की समीक्षा की थी। उस समय मार्च 2024 तक लंबित राशि में 50 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लंबित वित्तीय मामलों की राशि में अपेक्षित कमी नहीं आई।

9,737 करोड़ से बढ़कर 18,060 करोड़ रुपये हुई लंबित राशि
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2001 से 2022-23 तक के लंबित वित्तीय मामलों में 9,737 करोड़ रुपये दर्ज किए गए थे। वहीं, वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि से संबंधित मामलों में यह राशि बढ़कर 18,060 करोड़ रुपये बताई गई है। वित्त मंत्री ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी धन का पूरा हिसाब होना जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि लंबित राशि के निपटारे और वसूली के लिए कार्रवाई की जाएगी। इतनी बड़ी रकम से जुड़े मामलों का समय पर समाधान नहीं होना वित्तीय अनुशासन और विभागीय जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा है।
गबन, वसूली और अंकेक्षण आपत्तियों का ब्योरा
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लंबित वित्तीय मामलों में अलग-अलग श्रेणियों की राशि इस प्रकार है:
| वित्तीय मामले | लंबित राशि |
|---|---|
| गबन | 78.06 करोड़ रुपये |
| वित्तीय दुरुपयोग | 9.14 करोड़ रुपये |
| वसूली योग्य राशि | 5,215 करोड़ रुपये |
| असमायोजित अग्रिम | 1,162 करोड़ रुपये |
| अंकेक्षण आपत्तियां | 7,666 करोड़ रुपये |
| जमा की जाने वाली राशि | 3,930 करोड़ रुपये |
इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी रकम विभिन्न वित्तीय श्रेणियों में लंबित है। हालांकि, इन सभी मदों को सीधे सरकारी खजाने से गायब हुई राशि मानना सही नहीं होगा। इनमें वसूली योग्य रकम, खर्च का समायोजन और अंकेक्षण संबंधी आपत्तियां भी शामिल हैं, जिनकी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

कई विभागों में सामने आई थीं वित्तीय अनियमितताएं
वर्ष 2023 की समीक्षा में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार, स्वास्थ्य, पथ निर्माण और कृषि विभाग में अधिक वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई थी। इसके अलावा स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, ग्रामीण विकास, नगर विकास, जल संसाधन, खान और परिवहन विभाग भी समीक्षा के दायरे में रहे थे। तत्कालीन वित्त मंत्री ने लंबित मामलों की समीक्षा और निपटारे के लिए बिहार की तर्ज पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्देश भी दिया था। अब 22 अक्टूबर को होने वाली बैठक से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए विभागवार क्या कदम उठाए जाएंगे।


















