Samachar Post रिपोर्टर, गुमला : जिले के अलग-अलग इलाकों में जंगली हाथियों की सक्रियता से ग्रामीणों में चिंता बनी रहती है। हाथियों के करीब जाने, उनका पीछा करने या फसल और घरों को बचाने के दौरान कई बार लोग जोखिम उठा लेते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। गुमला के DFO अहमद बिलाल अनवर ने कहा कि वन विभाग का प्रयास रहता है कि हाथियों के कारण किसी तरह की जनहानि या संपत्ति का नुकसान न हो। इसके बावजूद यदि कोई घटना होती है तो सरकार की ओर से निर्धारित प्रावधानों के तहत प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाता है।
हाथी के हमले में मौत पर 10 लाख रुपये की सहायता
DFO के अनुसार, जंगली हाथी की चपेट में आने से किसी व्यक्ति की मौत होने पर कुल 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। मृत्यु के तीन दिन के भीतर 1 लाख रुपये की सहायता, जबकि करीब दो सप्ताह के अंदर 4 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। शेष 5 लाख रुपये मृतक के आश्रित के नाम पांच साल के लिए बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट किए जाते हैं। इसके अलावा पीड़ित परिवार को 2,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी बैंक के माध्यम से दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।

चोट और मकान-फसल के नुकसान पर भी मुआवजा
DFO ने बताया कि जंगली जानवर के हमले में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 2 लाख रुपये, जबकि हल्की चोट लगने पर 35 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। मकान के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में 2 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। वहीं पक्के मकान के लिए 1.50 लाख रुपये और साधारण मकान के नुकसान पर 1.30 लाख रुपये की राशि दी जाती है। भंडारित अनाज के नुकसान की स्थिति में 3,600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रतिपूर्ति सहित अन्य सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
हाथियों के पास जाकर सेल्फी लेने से बचें
DFO अहमद बिलाल अनवर ने लोगों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर उनके करीब न जाएं। उन्होंने कहा कि कई बार लोग हाथियों के पास जाकर सेल्फी लेने, उनका पीछा करने या उन्हें पत्थर मारने की कोशिश करते हैं। इससे हाथी उत्तेजित हो सकते हैं और खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि जंगली हाथी अक्सर उन्हीं रास्तों से आवागमन करते हैं, जिनका इस्तेमाल वे लंबे समय से करते आए हैं। ऐसे रास्तों पर लोगों की भीड़ और गतिविधियां बढ़ने से टकराव की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए हाथियों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
हाथी दूसरे जिले में जाए तो वन विभाग को दी जाती है सूचना
DFO ने बताया कि यदि गुमला में सक्रिय हाथी रांची, खूंटी या लातेहार जैसे दूसरे जिले की ओर चला जाता है तो संबंधित क्षेत्र के वन अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाती है। इसका उद्देश्य हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखना है। उन्होंने कहा कि वन विभाग लोगों के साथ-साथ जंगली हाथियों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर काम करता है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि हाथियों की गतिविधि दिखाई देने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय तत्काल वन विभाग के कर्मचारियों या वन प्रमंडल पदाधिकारी को सूचना दें।





















