Samachar Post रिपोर्टर, पलामू : झारखंड कांग्रेस के प्रदेश समन्वयक रामदेव प्रसाद यादव ने जातीय जनगणना की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि जातीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम नहीं रखना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव करते हुए नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है। रामदेव यादव ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा कराई जा रही जातीय जनगणना की प्रक्रिया में कई खामियां हैं। उनके मुताबिक, इस तरीके से जातियों के सही आंकड़े सामने आने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि OBC को अलग कॉलम नहीं देने से पिछड़े वर्ग की वास्तविक आबादी का सही आकलन नहीं हो पाएगा।
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ओपन एंडेड सवालों पर भी जताई आपत्ति
रामदेव यादव ने जातीय जनगणना में ओपन एंडेड क्वेश्चन के तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत में एक ही जाति को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम, उपजाति और स्थानीय भाषा के आधार पर जाना जाता है। ऐसे में एक ही जाति के कई नाम दर्ज होने से आंकड़े अलग-अलग हिस्सों में बंट सकते हैं और अंतिम आंकड़ों के विश्लेषण में कठिनाई पैदा हो सकती है।

जातियों की सूची तैयार करने की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि जातीय जनगणना की प्रक्रिया में पहले से जातियों की सूची तैयार की जानी चाहिए थी। उन्होंने तेलंगाना के 2024 और बिहार के 2022 के जातीय सर्वेक्षणों का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह व्यवस्थित तरीके से आंकड़े जुटाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि पिछड़ा वर्ग के लिए स्पष्ट वर्गीकरण नहीं होने से OBC की वास्तविक संख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन मुश्किल होगा।
कॉलम-10 में OBC के लिए अलग विकल्प की मांग
रामदेव यादव ने प्रश्नावली के कॉलम-10 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए विकल्प दिए गए हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम नहीं रखा गया है। उन्होंने मांग की कि मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा कर कॉलम-10 में OBC के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों से चर्चा के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की। रामदेव यादव ने कहा कि जातीय जनगणना के आंकड़े तभी सार्थक होंगे, जब उनमें समाज के सभी वर्गों की सही और स्पष्ट हिस्सेदारी दर्ज हो। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रक्रिया में आवश्यक सुधार कर इसे अधिक सटीक और उपयोगी बनाने की अपील की।

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