Samachar Post डेस्क, रांची : पलामू के मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और सदर अस्पताल, डालटेनगंज में प्रस्तावित तीन मॉड्युलर ऑपरेशन थिएटर (OT) के टेंडर को लेकर भवन निर्माण विभाग की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करीब 2.01 करोड़ रुपये का टेंडर ई-प्रोक्योरमेंट के बजाय ऑफलाइन तरीके से निकाला गया और टेंडर की निर्धारित वैधता अवधि खत्म होने के बाद भी इसकी वित्तीय बोली खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मामले से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस टेंडर की प्रक्रिया में शर्तों में बदलाव, कुछ बिडरों के दस्तावेजों पर आपत्तियां और अलग-अलग स्तर पर हुई जांच के कारण मामला लंबे समय तक उलझा रहा। अब करीब 10 महीने बाद वित्तीय बोली खोलने की प्रक्रिया शुरू होने से पूरी निविदा प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले ई-टेंडर, फिर 2.01 करोड़ का ऑफलाइन टेंडर
राज्य सरकार के निर्णय के तहत विभिन्न जिलों के अस्पतालों में मॉड्युलर OT का निर्माण कराया जाना है। हजारीबाग में तीन और कोडरमा में दो मॉड्युलर OT के लिए ई-टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई। देवघर में भी OT के लिए ई-टेंडर निकाला गया। वहीं, डालटेनगंज में 22 अप्रैल 2025 को तीन अलग-अलग OT के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किए गए थे। हालांकि कुछ दिनों बाद इन निविदाओं को रद्द कर दिया गया। इसके बाद तीनों OT को एक साथ जोड़कर करीब 2.01 करोड़ रुपये का ऑफलाइन टेंडर जारी किया गया। इस टेंडर के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 26 नवंबर 2025 और टेंडर खोलने की तारीख 27 नवंबर 2025 तय की गई थी।
बिडर के दस्तावेजों पर आपत्ति से उलझी प्रक्रिया
टेंडर प्रक्रिया के दौरान एक बिडर एसके इंटरप्राइजेज के अनुभव और अन्य प्रमाणपत्रों को लेकर तत्कालीन कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम ने आपत्तियां दर्ज की थीं। इसके बाद एसके इंटरप्राइजेज की ओर से भी भवन निर्माण विभाग के अवर सचिव के समक्ष दस्तावेजों के साथ अपनी आपत्ति रखी गई। अवर सचिव के पत्र के बाद मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता के स्तर पर जांच हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग स्तर पर हुई जांच में विरोधाभासी निष्कर्ष सामने आने से टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब करीब 10 महीने बाद इसकी वित्तीय बोली खोलने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
50 लाख से ऊपर के टेंडर के लिए ई-प्रोक्योरमेंट का आदेश
ऑफलाइन टेंडर को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन सचिव सुनील कुमार के हस्ताक्षर से 19 नवंबर 2020 को जारी आदेश संख्या 2163 भ में 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की सभी निविदाओं को ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के तहत निष्पादित किए जाने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में 2.01 करोड़ रुपये के डालटेनगंज मॉड्युलर OT टेंडर को ऑफलाइन जारी किए जाने के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
टेंडर की वैधता अवधि पर भी उठे सवाल
राज्य सरकार के स्टैंडर्ड बिड डॉक्युमेंट (SBD) के अनुसार, निविदा जमा करने की अंतिम तारीख के बाद उसकी वैधता अवधि कम से कम 120 दिन और अधिकतम 180 दिन निर्धारित की जाती है। डालटेनगंज OT टेंडर की अंतिम तिथि 26 नवंबर 2025 थी। ऐसे में 180 दिनों की अधिकतम वैधता अवधि भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद करीब नौ-दस महीने बाद वित्तीय बोली खोलने की प्रक्रिया शुरू किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या निर्धारित वैधता अवधि समाप्त होने के बाद उसी टेंडर को आगे बढ़ाया जा सकता है और यदि हां, तो इसके लिए विभाग ने कौन-सी प्रक्रिया अपनाई है?
अंतिम दिन बदली गई सर्विस सेंटर की शर्त
टेंडर की शर्तों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शुरुआती शर्त के मुताबिक निविदा में भाग लेने वाली कंपनी के पास डालटेनगंज में सर्विस सेंटर होना आवश्यक था। लेकिन टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख को जारी शुद्धि पत्र में इस शर्त में बदलाव किया गया। इसके बाद डालटेनगंज के अलावा रांची में सर्विस सेंटर रखने वाली कंपनियों को भी निविदा में भाग लेने की अनुमति दी गई। अंतिम दिन शर्त में बदलाव क्यों किया गया और यह बदलाव निर्धारित निविदा प्रक्रिया के अनुरूप था या नहीं, इसे लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसके अलावा भाग लेने वाली कंपनियों के आवश्यक इलेक्ट्रिकल लाइसेंस को लेकर भी तकनीकी विवाद सामने आया है।

अन्य जिलों के टेंडर से तुलना भी चर्चा में
रिपोर्ट के मुताबिक, हजारीबाग और कोडरमा में मॉड्युलर OT के टेंडर में SNG और Sugu नाम की कंपनियां L-1 रही हैं। डालटेनगंज की निविदा में भी इन दोनों कंपनियों के साथ एसके इंटरप्राइजेज ने भाग लिया है। इन समानताओं के आधार पर टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि किसी कंपनी या अधिकारी के खिलाफ अनियमितता साबित होने की बात कहना जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के बिना उचित नहीं होगा।
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अधिकारियों से मांगा गया जवाब
निविदा की वैधता और ई-टेंडर से जुड़े सवालों पर कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम से संपर्क किया गया। उन्होंने सवालों का जवाब देने के बजाय कार्यालय आकर बातचीत करने की बात कही। बाद में व्हाट्सऐप के जरिए भी सवाल भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।वहीं, मुख्य अभियंता पंकज कुमार से भी फोन और व्हाट्सऐप के माध्यम से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई। उनकी ओर से भी कोई जवाब नहीं मिला। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की इस निविदा प्रक्रिया में नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ है या नहीं। विभाग की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।


