ऋषभ कुमार रिम्स के किसी पद में नहीं, संस्थान में हॉस्पिटल मैनेजमेंट का स्टूडेंट | सवाल- कैसे बनाया गया कमेटी का सदस्य।उठ रहे सवाल- यदि अधिवक्ता के नाते शामिल किया गया तो क्या उनके अलावा कोई और अधिवक्ता नहीं? अगर स्टूडेंट के नाते शामिल किया गया तो और 5 स्टूडेंट हैं उन्हें क्यों नहीं?
Samachar Post, रांची : रिम्स में 10 साल से अधिक समय से कार्यरत अनुबंध व दैनिक कर्मियों का समायोजन किया जाना है। रिम्स के पिछले करीब पांच शासी परिषद की बैठक का यह अहम एजेंडा रहा है। पिछले चार सालों से इसके निर्देश दिए गए हैं लेकिन प्रक्रिया अब जाकर शुरू होने वाली है। हालांकि, प्रक्रिया शुरू करने से पहले रिम्स प्रबंधन ने एक कमेटी बनाई है जिसे लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस 5 सदस्यीय कमेटी में 3 उस जगह सेवारत हैं जहां से वर्तमान रिम्स निदेशक सेवा समाप्त कर रिम्स आएं हैं। कमेटी का अध्यक्ष एसजीपीजीआई के एक चिकित्सक को बनाया गया है। जबकि दो सदस्य सैफई के हैं, जहां निदेशक डॉ. राजकुमार वाइस चांसलर रह चुके हैं। वहीं, एक अन्य सदस्य रिम्स के सर्जन डॉ. निशिथ एक्का हैं और पांचवां सदस्य रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के पुत्र ऋषभ कुमार हैं।
बताते चले कि ऋषभ कुमार वर्तमान में रिम्स में किसी भी पद पर कार्यरत नही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि उस कमेटी में इन्हें सदस्य किस आधार पर बनाया गया जिस कमेटी के द्वारा अनुबंध व दैनिक कर्मियों के समायोजन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाना है। इधर, इस खबर के संदर्भ में रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया पर उन्होंने न फोन का और न वाट्सऐप मैसेज का जवाब दिया।
कमेटी के पत्र में ऋषभ कुमार का पदनाम अस्पताल प्रशासन रिम्स
रिम्स के प्रशासनिक पदाधिकारी के हस्ताक्षर से जारी कमेटी के पत्र में ऋषभ कुमार का पदनाम अधिवक्ता और अस्पताल प्रशासन रिम्स रांची लिखा हुआ है। जबकि सच्चाई है कि ऋषभ कुमार रिम्स में हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोर्स के स्टूडेंट हैं। इसी साल फरवरी में उन्होंने रिम्स में नामांकन लिया है। अब सवाल यह है कि ऋषभ कुमार को यदि अधिवक्ता के नाते इस महत्वपूर्ण कमेटी में शामिल किया है तो क्या राज्य में वे इकलौते अधिवक्ता हैं? वहीं, अगर हॉस्पिटल मैनेजमेंट स्टूडेंट के नाते शामिल किया गया है तो निदेशक के बेटे को ही क्यों? इस कोर्स में ऋषभ कुमार के अलावा 5 अन्य स्टूडेंट भी शामिल हैं। उन्हें क्यों शामिल नही किया गया।
5 सदस्यीय कमेटी में भी 3 एसजीपीजीआई व सैफई के…
इस पांच सदस्यीय कमेटी में 3 एक्सपर्ट बाहर के हैं। दो सैफई के हैं और 1 एसजीपीजीआई के हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठा रहा है कि क्या राज्य में या देश भर में और कहीं भी एक्सपर्ट नही हैं जो उन जगहों के चिकित्सकों के प्राथमिकता दी गई जहां से रिम्स निदेशक का कनेक्शन है। मिली जानकारी के अनुसार कमेटी में इन तीनों नामों की अनुशंसा निदेशक ने ही की थी।
समायोजन को लेकर 30 व 31 अगस्त को बैठक
कमेटी के सभी सदस्यों को पत्राचार कर जानकारी दी गई है कि 30 व 31 अगस्त को रिम्स प्रशासनिक भवन के पहले तल्ले स्थिति कॉन्फ्रेंस हॉल में महत्पपूर्ण बैठक रखी गई है। इस बैठक में 10 वर्षाें से अधिक समय से रिम्स में कार्यरत दैनिक व अनुबंध कर्मियों की सेवा नियमितिकरण पर निर्णय लिया जाना है।
प्रबंधन ने कहा…
ऐसा नहीं है कि जानबूझकर सिर्फ एसजीपीजीआई या सैफई से पैनलिस्ट शामिल किए गए है, चूंकि समायोजन को लेकर पूरा प्रस्ताव रिम्स ने तैयार किया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए बाहर का पैनलिस्ट जरूरी है। ताकि वो मामले में निष्पक्षता के साथ जांच कर सके। वहीं जहां तक ऋषभ कुमार को कमिटी में शामिल करने की बात है वो पेशे से अधिवक्ता हैं, उन्हें लीगल की अच्छी समझ है। इसलिए लीगल पहलुओं पर मामले को जांचने के लिए उन्हें शामिल किया गया है।
-डॉ राजीव रंजन, उपाधीक्षक सह जनसंपर्क अधिकारी, रिम्स।