BRICS पर चिदंबरम से अलग शशि थरूर की राय, बोले- भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय

Samachar Post डेस्क, रांची : BRICS सम्मेलन को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम से अलग राय रखी है। थरूर ने BRICS को वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि यह केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित संगठन नहीं है। उनके मुताबिक, सम्मेलन की मेजबानी भारत के लिए अपनी कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक भूमिका प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।हालांकि, थरूर ने BRICS की कुछ सीमाओं और चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संगठन के सदस्य देशों के बीच साझा रुख बनाना अब भी मुश्किल है।

चिदंबरम ने BRICS से फायदे पर उठाया था सवाल

दरअसल, पी. चिदंबरम ने हाल में सवाल उठाया था कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को क्या ठोस फायदा मिला। उन्होंने यह भी पूछा था कि BRICS सम्मेलन की मेजबानी से देश को वास्तविक रूप से क्या लाभ हासिल होगा। चिदंबरम के इस बयान पर भाजपा नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी थी और उन्हें लेकर राजनीतिक टिप्पणी की गई थी।

थरूर ने BRICS की कमजोरियां भी गिनाईं

शशि थरूर ने BRICS की अहमियत बताने के साथ उसकी कुछ कमजोरियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिका संबंध और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच पर्याप्त सहमति नहीं बन पाई है। थरूर के मुताबिक, इन मुद्दों पर BRICS के विदेश मंत्री भी साझा बयान जारी करने में एकमत नहीं हो सके। उन्होंने इसे संगठन की सीमाओं का उदाहरण बताया।

व्यापार के मोर्चे पर भारत के लिए चिंता

थरूर ने BRICS देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि BRICS सदस्य देशों के साथ भारत का आयात बढ़ा है, जबकि निर्यात में कमी आई है। उनके मुताबिक, व्यापार के इस असंतुलन को भारत के हित में नहीं माना जा सकता और BRICS के आर्थिक पक्ष पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

11 देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं

शशि थरूर ने BRICS के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से अधिक देश हैं, जबकि BRICS के 11 सदस्य देश दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के करीब 41 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी वजह से उन्होंने BRICS को भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मंच बताया।

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भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया

थरूर ने कहा कि BRICS सम्मेलन की मेजबानी भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। उनके अनुसार, ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारत को अपनी कूटनीतिक ताकत, नेतृत्व क्षमता और वैश्विक दक्षिण के साथ संबंधों को मजबूत करने का अवसर देते हैं। इस तरह BRICS को लेकर कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। जहां चिदंबरम ने सम्मेलन से मिलने वाले व्यावहारिक लाभ पर सवाल उठाया, वहीं थरूर ने इसकी रणनीतिक और कूटनीतिक अहमियत को अधिक महत्व दिया है।

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