जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर, झारखंड के पर्यटन को नई दिशा देने की कोशिश में याद किए जाएंगे सुदिव्य कुमार सोनू

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को निधन हो गया। हार्ट अटैक को उनकी मौत की वजह बताया गया है। उनके निधन की खबर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर है। राज्यभर से लोग अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने गिरिडीह पहुंच रहे हैं। 26 जुलाई 1970 से 6 सितंबर 2026 तक का उनका जीवन झामुमो के प्रति समर्पण, संघर्ष और संगठन के साथ लंबी राजनीतिक यात्रा का गवाह रहा। जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले सुदिव्य कुमार सोनू दो बार गिरिडीह से विधायक बने और दिसंबर 2024 में हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

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गिरिडीह के बेटे का संघर्षपूर्ण राजनीतिक सफर

गिरिडीह में जन्मे सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 1989 में झामुमो से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। उनका दिशोम गुरु शिबू सोरेन से बेहद करीबी संबंध रहा। बताया जाता है कि शिबू सोरेन ने उनके पिता से कहकर सुदिव्य को अपने साथ रखा और उन्हें बेटे की तरह स्नेह दिया। झारखंड आंदोलन के दौर में भी सुदिव्य कुमार सोनू सक्रिय रहे। आंदोलन के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और मुकदमों का भी सामना किया। इसके बावजूद पार्टी और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा बनी रही। तीन दशक से अधिक समय तक झामुमो से जुड़े रहने के बाद उन्हें चुनावी राजनीति में भी सफलता मिली। 2019 और 2024 में उन्होंने गिरिडीह विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। दिसंबर 2024 में उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। गिरिडीह से करीब 24 साल बाद झामुमो के किसी नेता को मंत्री पद मिलने का गौरव भी सुदिव्य कुमार सोनू के नाम रहा।

हेमंत सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में थे शामिल

सुदिव्य कुमार सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था। पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अलावा नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी रही। सरकार में रहते हुए वे झारखंड के विकास और राज्य की पहचान को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय नजर आए।

पर्यटन को लेकर अलग था विजन

सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक सफर में पर्यटन विभाग उनके महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्रों में रहा। वे झारखंड को केवल धार्मिक पर्यटन के लिए पहचाने जाने के बजाय प्राकृतिक, आदिवासी, खनन और एडवेंचर टूरिज्म के लिए भी पहचान दिलाना चाहते थे। उनका मानना था कि झारखंड के हर हिस्से में अपनी एक कहानी और पहचान है, जरूरत सिर्फ उसे देश-दुनिया के सामने लाने की है। पर्यटन के क्षेत्र में उन्होंने राज्य की पर्यटन क्षमता को व्यापक रूप से विकसित करने पर जोर दिया और धार्मिक पर्यटन के साथ दूसरे पर्यटन क्षेत्रों को भी बढ़ावा देने की दिशा में पहल की।

पर्यटन विभाग में इन योजनाओं पर दिया जोर

सुदिव्य कुमार सोनू के कार्यकाल में झारखंड पर्यटन को लेकर कई योजनाओं और पहलों पर काम आगे बढ़ाने की कोशिश हुई। इनमें इको-टूरिज्म, ट्राइबल टूरिज्म और माइंस टूरिज्म सर्किट को विकसित करने की दिशा में पहल प्रमुख रही। रजरप्पा, पंचघाघ और नेतरहाट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्काई वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा नेतरहाट में उत्सव आयोजित करने की तैयारी, कोलकाता में टूरिज्म रोड शो और दूसरे राज्यों के सफल पर्यटन मॉडल का अध्ययन जैसी पहल भी उनके एजेंडे में शामिल रहीं। उन्होंने होमस्टे पॉलिसी और नई पर्यटन नीति को लेकर भी काम आगे बढ़ाने की कोशिश की। खेल और पर्यटन को साथ जोड़कर झारखंड को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी से भी मुलाकात की थी।

झामुमो और झारखंड की राजनीति में बड़ी कमी

सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झामुमो के लिए ऐसे समय में हुआ है, जब वे सरकार और संगठन दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। जमीनी राजनीति से उठकर मंत्री पद तक पहुंचे सुदिव्य ने करीब तीन दशक से अधिक समय तक पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी। उनके समर्थकों के लिए वह सिर्फ एक मंत्री या विधायक नहीं, बल्कि संगठन से जुड़े ऐसे नेता थे, जिन्होंने संघर्ष के दौर से सत्ता तक का सफर तय किया। उनके निधन से झामुमो ने अपना एक समर्पित नेता खो दिया है और झारखंड की राजनीति में भी एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है।

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