MMDR Amendment Bill: हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी से मांगा समर्थन, झारखंड के राजस्व और राज्यों के अधिकार पर जताई चिंता

Meenu | August 14, 2026 | 02:24 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : MMDR Amendment Bill, 2026 को लेकर झारखंड की सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप और समर्थन की अपील की है। मुख्यमंत्री ने 13 अगस्त को राहुल गांधी को पत्र लिखकर विधेयक के प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित हो चुका है और इसमें प्रस्तावित धारा 9D के जरिए खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर राज्य सरकारों की टैक्स, सेस या लेवी लगाने की शक्ति को सीमित करने का प्रावधान किया गया है।

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प्रधानमंत्री के बाद राष्ट्रपति के सामने भी उठाया मुद्दा

हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी को बताया कि वह इससे पहले प्रधानमंत्री के समक्ष भी झारखंड सरकार की आपत्तियां रख चुके हैं। उन्होंने प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य की चिंताओं को राष्ट्रपति के समक्ष भी रखने की बात कही है। उन्होंने राहुल गांधी से इस मुद्दे को संसद और अन्य उपयुक्त मंचों पर उठाने की अपील की है।

झारखंड के लिए खनिज राजस्व क्यों है महत्वपूर्ण?

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन से होने वाली आय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके अनुसार, राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2024-25 में खनन से संबंधित प्राप्तियां झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 84.9 प्रतिशत थीं। सोरेन ने कहा कि झारखंड के कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, यूरेनियम समेत अन्य खनिजों ने देश के उद्योग और बुनियादी ढांचे को लंबे समय तक मजबूती दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि खनन गतिविधियों की कीमत झारखंड के लोगों, खासकर आदिवासी समुदायों और खनन प्रभावित इलाकों के निवासियों को विस्थापन, पारंपरिक आजीविका के नुकसान, पर्यावरणीय क्षरण और जंगल-जमीन व जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के रूप में चुकानी पड़ी है।

राज्यों के अधिकार और संघीय ढांचे का सवाल

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. मामले में 25 जुलाई 2024 के फैसले का भी उल्लेख किया। सोरेन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की विधायी क्षमता को मान्यता दी थी। इसके बाद झारखंड विधानसभा ने 2024 में Mineral Bearing Land Cess कानून पारित किया था। मुख्यमंत्री का तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन से इस संवैधानिक स्थिति पर असर पड़ सकता है और इससे राज्यों के अधिकार तथा सहकारी संघवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

राहुल गांधी से सामूहिक प्रयास की अपील

हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वह झारखंड समेत अन्य खनिज उत्पादक राज्यों की चिंताओं को संसद और दूसरे उपयुक्त मंचों पर उठाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकार, संवैधानिक मूल्यों और संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल झारखंड के खनिज राजस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले लाभ के न्यायसंगत बंटवारे, राज्यों के अधिकार और खनन प्रभावित लोगों के हितों से भी जुड़ा है।

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