RSS कार्यालय पर हमले के आरोपी का दावा: पंजाब से हथियार लाकर झारखंड और यूपी में बड़ी साजिश रचने की थी तैयारी

Rupa Kumari | June 20, 2026 | 11:18 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रांची स्थित कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले के मामले में गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एजेंसियां एक व्यापक साजिश के पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं, जिसके तार झारखंड, बिहार, मुंबई और दुबई तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 16 जून की रात चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित RSS कार्यालय पर हुए हमले के आरोपी अमन अंसारी उर्फ गोलू ने पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। हालांकि एजेंसियां उसके बयानों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रही हैं।

आर्थिक तंगी और विदेश प्रवास के दौरान बने संपर्क

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक कठिनाइयों के कारण उसने कम उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी। रोजगार की तलाश में वह पहले मुंबई गया, जहां एसी रिपेयरिंग का काम सीखा। बाद में वह ओमान और फिर दुबई भी गया, जहां एक निजी कंपनी में कार्यरत रहा। बताया जा रहा है कि दुबई में रहने के दौरान उसकी पहचान विभिन्न राज्यों के कुछ लोगों से हुई। जांच एजेंसियां इन्हीं संपर्कों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करने का दावा

सूत्रों के मुताबिक आरोपी ने दावा किया है कि भारत लौटने के बाद कुछ लोगों ने उससे संपर्क किया और कथित तौर पर उसे पैसों का लालच देकर कुछ युवकों की व्यवस्था करने को कहा। आरोपी के अनुसार, उसे बड़े पैमाने पर वारदात को अंजाम देने की बात कही गई थी। जांच एजेंसियां इस दावे की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की पहचान और उनके संभावित नेटवर्क की जांच कर रही हैं। मामले की जांच कर रही एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कथित साजिश में शामिल लोगों के संपर्क किन-किन राज्यों और देशों तक फैले हुए थे। आरोपी द्वारा दिए गए इनपुट के आधार पर मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।

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जांच जारी, एजेंसियां जुटा रहीं साक्ष्य

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी के बयानों का विभिन्न स्रोतों से सत्यापन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम और कथित साजिश की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। एजेंसियों का फोकस इस बात पर है कि मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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