Samachar Post डेस्क, बिहार : बिहार में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। शुरुआती दौर में इस व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे, लेकिन अब इसके सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई देने लगे हैं। डीबीटी के जरिए सरकार सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में राशि भेज रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो गई है।
बिहार को मिले 49,622 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने बिहार को डीबीटी के माध्यम से 49,622.73 करोड़ रुपये जारी किए। यह पूरी राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की गई। सरकार का दावा है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगी है। पहले कई योजनाओं की राशि नकद या चेक के जरिए दी जाती थी, जिसमें गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती थी। डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने के बाद इस समस्या में काफी कमी आई है।
यह भी पढ़ें: जमशेदपुर में खड़ी तीन बसों में लगी भीषण आग, दो बसें जलकर राख
पूर्वी चंपारण में सबसे ज्यादा लाभार्थी
राज्य में डीबीटी लाभार्थियों की कुल संख्या 17.37 करोड़ बताई गई है। इनमें सबसे अधिक लाभार्थी पूर्वी चंपारण जिले में हैं, जहां करीब 87 लाख लोगों को डीबीटी का लाभ मिला है। इसके बाद समस्तीपुर और मधुबनी जिलों का स्थान है। बिहार में पहले से इंदिरा आवास योजना, साइकिल योजना और पोशाक योजना जैसी योजनाओं में सीधे बैंक खाते में राशि भेजने की व्यवस्था लागू थी। इन योजनाओं की सफलता के बाद डीबीटी को बड़े स्तर पर लागू किया गया।
328 केंद्रीय योजनाओं में लागू है DBT
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डीबीटी व्यवस्था को देशभर में मजबूत किया गया। सरकार का कहना है कि इससे योजनाओं का लाभ तय समय पर सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है और सरकारी धन के रिसाव पर रोक लगी है। डीबीटी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए लाभार्थियों का बैंक खाता आधार से लिंक होना जरूरी माना गया है। वर्तमान में केंद्र सरकार की 328 योजनाओं में डीबीटी व्यवस्था लागू है। वर्ष 2025-26 में पूरे देश में 6.17 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। बिहार के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को भी बड़ी राशि जारी की गई है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।