Samachar Post रिपोर्टर, रांची :चाईबासा दौरे के दौरान प्रशासनिक व्यवहार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा जताई गई नाराजगी अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। भारतीय जनता पार्टी खुलकर अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतर आई है। भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।
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अर्जुन मुंडा ने प्रशासनिक रवैये पर जताई थी नाराजगी
दरअसल, अर्जुन मुंडा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर चाईबासा प्रशासन के व्यवहार पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि भले ही वे वर्तमान में न विधायक हैं, न सांसद और न मंत्री, लेकिन वे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चाईबासा प्रवास के दौरान प्रशासन की ओर से सामान्य शिष्टाचार और औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। अर्जुन मुंडा ने इसे प्रशासनिक अनुभव की कमी, प्रशासनिक अहंकार और सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता से जोड़कर देखा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से प्रशासन विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर संवाद करता था, जिससे प्रशासनिक कार्यसंस्कृति मजबूत होती थी।
लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस घटना को लोकतांत्रिक परंपराओं और जनजातीय समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जनजातीय समाज के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के सम्मान का विषय है।
बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन पर निशाना
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता हमेशा स्थायी नहीं रहती। उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन जी, आज आप मुख्यमंत्री हैं, कल आप भी भूतपूर्व हो सकते हैं। लोकतंत्र की मर्यादा और सामाजिक सम्मान को कभी कमजोर मत होने दीजिए।” बाबूलाल ने कहा कि प्रशासन यदि जनप्रतिनिधियों और समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन हो जाए तो यह लोकतांत्रिक संस्कारों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने अधिकारियों को “कुर्सी का अहंकार क्षणिक होता है” जैसी नसीहत भी दी।
2019 से झेल रहा हूं- निशिकांत दुबे
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे खुद 2019 से ऐसे व्यवहार का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार पर कई केस दर्ज किए गए हैं और सामूहिक लड़ाई से ही “राक्षसों का विनाश” संभव है। चाईबासा प्रकरण को लेकर भाजपा और झारखंड सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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