Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड की राजधानी रांची में ओड़िया समुदाय की सांस्कृतिक संस्था सागरिका द्वारा उत्कल दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। यह आयोजन सेल सैटेलाइट टाउनशिप स्थित सामुदायिक भवन में किया गया, जिसमें ओडिशा की समृद्ध परंपरा और संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भगवान जगन्नाथ की वंदना के साथ हुई। सागरिका के अध्यक्ष बी. के. परिडा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
‘वंदे उत्कल जननी’ से भावुक हुआ माहौल
सागरिका की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत ‘वंदे उत्कल जननी’ ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। इसके बाद बच्चों और महिलाओं ने नृत्य और संगीत के माध्यम से ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में ओडिसी नृत्य, कांची अभियान गीतिनाट्य, संबलपुरी लोक नृत्य ‘रसा जम्मु डाली’ और लोकप्रिय गीत ‘रंगबती’ की प्रस्तुति शामिल रही, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
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मुख्य अतिथि ने युवाओं को दी प्रेरणा
मुख्य अतिथि अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि युवा पीढ़ी को उत्कल की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली बच्चों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में सागरिका की स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही चित्रकला और संगीत प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। समाज सेवा के लिए पवित्र कुमार चौधरी और अशोक कुमार मलिक को सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर
संस्था के सलाहकार डॉ. जयंता कुमार रथ और मानस रंजन पांडा ने ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन उपाध्यक्ष पी. के. पाणिग्रही के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजन का संचालन सुलग्ना महांति और बनानी नंद ने किया। अंत में सभी के लिए रात्रि भोज का आयोजन भी किया गया।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।