Samachar Post डेस्क, रांची :केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में 2027 की जनगणना के लिए आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। इस बार घर-घर लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का काम मई और जून 2026 के बीच शुरू होगा। करीब 16 साल बाद यहां इतनी व्यापक डिजिटल तैयारी के साथ जनगणना कराई जाएगी।
डिजिटल सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा
इस बार पहली बार स्व-गणना को भी शामिल किया गया है। 17 मई से शुरू होने वाले 15 दिन के इस कार्यक्रम के दौरान लोग ऑनलाइन अपने विवरण जमा कर सकेंगे। जनगणना संचालन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में घरों की सूची तैयार की जाएगी और हर घर का दौरा कर आवश्यक जानकारी जुटाई जाएगी। यह प्रक्रिया लद्दाख में भी लागू होगी। पूरे केंद्र शासित प्रदेश में करीब 3,000 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये देशभर में काम कर रही लगभग 30 लाख कर्मियों की टीम का हिस्सा होंगे, ताकि डेटा संग्रह के दौरान कोई घर या व्यक्ति छूट न जाए।
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दो चरणों में होगी जनगणना
इस बार की जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी 2026 में घरों की सूची और हाउसिंग सेंसस, 2027 में जनसंख्या की गिनती होगी। जनसंख्या गणना के लिए सामान्य कटऑफ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है। हालांकि हिमालयी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
हाउस लिस्टिंग में पूछे जाएंगे 33 सवाल
घर-घर सर्वे के दौरान अधिकारियों द्वारा 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें मकान मालिक, उपयोग, निर्माण सामग्री, रहने वालों की संख्या और मुखिया से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इससे प्रत्येक घर का विस्तृत डेटा तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग भविष्य की योजनाओं में किया जा सकेगा।
2027 जनगणना की खास बातें
यह देश की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। इसमें आवास, सुविधाएं, जनसांख्यिकी और भाषा समेत विस्तृत डेटा जुटाया जाएगा। प्रक्रिया जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के तहत संचालित होगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना COVID-19 महामारी के कारण स्थगित करनी पड़ी थी।
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