Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) में वर्षों से खाली पड़े अध्यक्ष, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर और सदस्य के पद अब भी नहीं भरे जा सके हैं। इन रिक्त पदों को भरने को लेकर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई जून 2025 में हाईकोर्ट में हुई थी। तब राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि चार महीने के भीतर (अक्टूबर 2025 तक) सभी पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। लेकिन निर्धारित समय से दो माह अधिक बीतने के बाद भी रेरा अब भी बिना चेयरमैन, बिना एडजुडिकेटिंग ऑफिसर और बिना सदस्य के ही चल रहा है।
चार साल से बिना चेयरमैन, दो साल से एओ पद खाली
रेरा चेयरमैन का पद 6 जनवरी 2021 से रिक्त है। एडजुडिकेटिंग ऑफिसर का पद 25 नवंबर 2022 से खाली है। वहीं, सदस्य का पद भी लंबे समय से खाली है। पद खाली रहने की वजह से प्राधिकरण में 70 से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें कई शिकायतें डेवलपर्स द्वारा समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने, फ्लैट की डिले पजेशन, रिफंड विवाद और रजिस्ट्रेशन नियमों से जुड़ी हैं।
चेयरमैन नियुक्ति प्रक्रिया कई बार शुरू हुई, लेकिन पूरी नहीं
झारखंड RERA के चेयरमैन पद के लिए चयन प्रक्रिया कई बार शुरू होने के बावजूद अब तक अधूरी है। सेवानिवृत्त IAS अरुण कुमार सिंह का नाम इस पद के लिए लंबे समय तक प्रमुख दावेदार रहा। जानकारी के अनुसार, मार्च 2024 में हाईकोर्ट के जजों की एक विशेष बैठक में भी अरुण कुमार सिंह को चेयरमैन पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में अनुशंसित किया गया था। इसके बावजूद एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है, और पद अब भी रिक्त है।
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निर्णय लेने वाला कोई नहीं, लोग परेशान
अध्यक्ष और एओ न होने के कारण मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की निगरानी धीमी, होमबायर्स की शिकायतों का समाधान रुका, कई बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई फंसी हुई है। स्थिति ऐसी है कि रेरा सिर्फ नाम के लिए चल रहा है, निर्णय लेने वाला प्रमुख पद ही नहीं है।
क्या है RERA और क्यों जरूरी?
रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) का गठन इसलिए किया गया था ताकि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बनी रहे, बिल्डर–खरीदार विवाद कम हों, प्रोजेक्ट समय पर पूरा हों, खरीदारों को ठगी या धोखाधड़ी से बचाया जा सके, फ्लैट खरीद प्रक्रिया में समानता और सुरक्षा सुनिश्चित हो। क्याेंकि रेरा को अधिकार है कि वह प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करे, रजिस्ट्रेशन कैंसल करे, बिल्डरों पर जुर्माना लगाए, खरीदारों की शिकायतों की सुनवाई करे, मुआवजा या रिफंड का आदेश दे सके।
पद खाली रहने से क्या परेशानी हो रही है?
पिछले कुछ वर्षों में रेरा के ठप रहने के बड़े प्रभाव सामने आए हैं। करीब 70+ शिकायतें महीनों से फाइलों में धूल खा रही हैं। एडजुडिकेटिंग ऑफिसर नहीं होने से कंपेंसेशन और रिफंड के आदेश रुक गए हैं। बिना चेयरमैन के कड़े आदेश जारी नहीं हो पा रहे, जिससे कुछ बिल्डर नियमों के उल्लंघन के बावजूद सक्रिय हैं। मॉनिटरिंग न होने से कई प्रोजेक्ट्स में काम की गति धीमी, खरीदारों का भरोसा टूटा है। कई शिकायतकर्ता महीनों से रेरा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।