Samachar Post डेस्क, रांची : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को अपना 68वां जन्मदिन मना रही हैं। इस अवसर पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, जनप्रतिनिधि और कई गणमान्य व्यक्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। राष्ट्रपति के जन्मदिवस पर उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्रसेवा के प्रति निरंतर समर्पण की कामना की जा रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने भी उनके प्रति सम्मान और शुभेच्छा व्यक्त की है।
साधारण परिवार से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। एक साधारण आदिवासी परिवार से आने वाली द्रौपदी मुर्मू ने कठिन परिस्थितियों और व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प का उदाहरण माना जाता है। यही कारण है कि आज वे देश की करोड़ों महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
शिक्षक से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन
द्रौपदी मुर्मू ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षिका के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने ओडिशा सरकार के सिंचाई एवं ऊर्जा विभाग में भी कार्य किया। वर्ष 1997 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और रायरंगपुर नगर पंचायत की पार्षद निर्वाचित हुईं। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया और वे दो बार ओडिशा विधानसभा की सदस्य चुनी गईं। राज्य सरकार में उन्होंने वाणिज्य एवं परिवहन, मत्स्य तथा पशु संसाधन विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली।

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं
वर्ष 2015 में द्रौपदी मुर्मू को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने 2015 से 2021 तक इस पद पर रहते हुए संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया। झारखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उनके कार्यकाल को संतुलित एवं गरिमापूर्ण माना जाता है। वर्ष 2022 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने व्यापक समर्थन हासिल करते हुए विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पराजित किया। 25 जुलाई 2022 को उन्होंने भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही वे देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनीं।
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प्रेरणा का प्रतीक हैं द्रौपदी मुर्मू
द्रौपदी मुर्मू का जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और सेवा भाव के बल पर कोई भी व्यक्ति कठिन परिस्थितियों को पार कर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की समावेशी ताकत और अवसरों की समानता को भी दर्शाता है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

