Samachar Post रिपोर्टर, पलामू : पलामू के मेदिनीनगर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MMCH) में सामने आए कथित HIV प्रकरण को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग जहां स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा कर रहे हैं, वहीं प्रभावित मरीजों और उनके परिजनों के बयान इस पूरे मामले पर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार 6 जून को एक HIV संक्रमित गर्भवती महिला का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। आरोप है कि इसके बाद उसी ऑपरेशन थिएटर में छह अन्य महिलाओं का भी सिजेरियन प्रसव कराया गया। घटना सामने आने के बाद संभावित स्वास्थ्य जोखिम और सूचना देने में हुई देरी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
परिजनों ने सूचना देने में देरी का लगाया आरोप
प्रभावित महिलाओं के परिजनों का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी तत्काल नहीं दी गई। उनके अनुसार 8 जून की शाम तक किसी विशेष चिकित्सकीय सावधानी या संभावित जोखिम के बारे में नहीं बताया गया था। परिजनों का दावा है कि पहली बार 8 जून की शाम या रात में उन्हें कुछ दवाएं दी गईं और एक महीने तक नियमित रूप से दवा लेने की सलाह दी गई। इसके बाद 9 जून को संबंधित महिलाओं के ब्लड सैंपल लिए गए और आगे की जांच प्रक्रिया शुरू की गई।
अस्पताल के दावे पर उठ रहे सवाल
दूसरी ओर, 7 जून को अस्पताल अधीक्षक डॉ. अजय कुमार की ओर से जारी पत्र में स्थिति को नियंत्रण में बताया गया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि स्थिति नियंत्रण में थी, तो संभावित रूप से प्रभावित मरीजों और उनके परिजनों को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच और चिकित्सकीय निगरानी की प्रक्रिया जारी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समय पर सूचना को बताया जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संभावित रूप से प्रभावित लोगों को तुरंत जानकारी देना, आवश्यक जांच कराना और जरूरत पड़ने पर बचाव संबंधी दवाएं उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार पारदर्शिता और समय पर संवाद मरीजों की सुरक्षा और भरोसे के लिए आवश्यक है। इसी वजह से सूचना देने में कथित देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
अब लोगों की नजरें जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की जांच पर टिकी हुई हैं। प्रभावित परिवारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, तथ्यों की स्पष्ट जानकारी और संभावित लापरवाही की जवाबदेही तय करने की मांग की है। फिलहाल प्रभावित परिवार जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।
