- इमरजेंसी में भी नहीं मिल रहा तुरंत ब्लड, परिजनों को खुद डोनर लाने की मजबूरी
Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इन दिनों ब्लड बैंक में खून की भारी कमी देखी जा रही है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को तुरंत रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा और परिजनों को पहले डोनर लाने के लिए कहा जा रहा है। इसके बाद भी खून मिलने में 6 से 7 घंटे तक का समय लग रहा है।
इमरजेंसी में भी इंतजार
हाल ही में हजारीबाग से आए एक गंभीर मरीज को रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने बी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत बताई, लेकिन ब्लड बैंक में एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं था। मरीज के परिजनों को खुद डोनर की व्यवस्था करनी पड़ी, जिसके बाद भी जांच प्रक्रिया में कई घंटे लग गए।
यह भी पढ़ें: झारखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी को मिला पहला कुलपति: एम्स के डॉ. सुधीर गुप्ता नियुक्त, अधिसूचना जारी
कई मरीजों को हो रही परेशानी
यह समस्या किसी एक मरीज तक सीमित नहीं है। अस्पताल के गायनी वार्ड में भर्ती एक महिला को पांच यूनिट खून की जरूरत पड़ी, जिसके लिए परिजनों को अलग-अलग डोनर जुटाने पड़े। इससे परिवार को भारी परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
रक्तदान शिविरों की कमी
जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में रक्तदान शिविरों की संख्या में कमी आई है, जिससे ब्लड बैंक का स्टॉक लगातार घटता जा रहा है। इसका सीधा असर गंभीर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस स्थिति को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी में मरीज को तुरंत रक्त उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।
नियमित शिविर की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।