Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड में विकास योजनाओं की रफ्तार पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत मार्च 2026 तक राज्य के 19 सांसदों को करीब 225.8 करोड़ रुपये आवंटित हुए, लेकिन इसमें से सिर्फ 122.8 करोड़ (54.4%) ही खर्च हो पाए। करीब 103 करोड़ रुपये अब भी अनखर्चे पड़े हैं, जो ‘डेड कैपिटल’ में बदल गए हैं। जो राशि गांवों में सड़क, शिक्षा, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होनी थी, वह अब तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी। इससे विकास कार्यों की रफ्तार पर सीधा असर पड़ रहा है।
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आदित्य साहू सबसे आगे
फंड उपयोग के मामले में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू शीर्ष पर हैं, जिन्होंने 85.86% राशि खर्च की। वहीं महुआ मांझी 83.97% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा दीपक प्रकाश, संजय सेठ, सुखदेव भगत भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले सांसदों में शामिल हैं। कई सांसदों ने आधे से भी कम राशि खर्च की है, जबकि एक सांसद ने अब तक कोई फंड उपयोग नहीं किया। इससे सवाल उठ रहे हैं कि विकास कार्यों में इतनी देरी क्यों हो रही है। सांसद निधि उपयोग के मामले में झारखंड पूरे देश में 9वें स्थान पर है। नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम जैसे राज्य इससे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
परियोजनाओं की धीमी रफ्तार
राज्य में अब तक 596 परियोजनाएं पूरी हुई हैं, लेकिन कुल परियोजनाओं की पूर्णता दर सिर्फ 13.9% है। इससे साफ है कि योजनाओं को जमीन पर उतरने में काफी समय लग रहा है। विश्लेषण में सामने आया है कि समस्या किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। भाजपा, झामुमो और कांग्रेस तीनों दलों के सांसदों में अच्छा और खराब प्रदर्शन देखने को मिला है। फंड उपयोग में देरी के प्रमुख कारण प्रस्ताव से स्वीकृति तक लंबी प्रक्रिया, विभागों के बीच समन्वय की कमी, प्राथमिकता का अभाव
जवाबदेही की कमी है। इस योजना के तहत हर सांसद को हर साल 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो दो किस्तों में जारी होते हैं। इसके बावजूद झारखंड में फंड का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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