झारखंड में बढ़ा पेयजल संकट: 79 हजार से ज्यादा चापाकल खराब, ग्रामीण इलाकों में हालात गंभीर

Rupa Kumari | March 26, 2026 | 03:30 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: गर्मी की शुरुआत के साथ ही झारखंड में पेयजल संकट गहराने लगा है। राज्य में बड़ी संख्या में चापाकलों के खराब होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 2,79,618 चापाकल हैं। इनमें से 1,99,842 चालू हैं, जबकि 79,669 चापाकल खराब पड़े हैं। यानी लगभग हर चौथा चापाकल काम नहीं कर रहा है, जिससे पानी की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ रहा है।

इन जिलों में सबसे खराब स्थिति

जिला-वार आंकड़ों में कई इलाकों की स्थिति चिंताजनक है, जामताड़ा  करीब 63% चापाकल खराब, गढ़वा लगभग 55%, बोकारो करीब 48%, देवघर लगभग 40% इसके अलावा गिरिडीह और सिंहभूम क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में चापाकल खराब हैं। हालांकि कुछ जिलों में हालात अपेक्षाकृत बेहतर हैं, लातेहार लगभग 7%, गोड्डा16%, साहिबगंज 17%, चतरा 18% शामिल हैं।

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अधूरी योजनाओं से बढ़ी समस्या

नल-जल योजना के अधूरे कार्य भी संकट को और बढ़ा रहे हैं। कई जगह पाइपलाइन और जलापूर्ति परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाई हैं, जिससे लोग अब भी चापाकलों पर निर्भर हैं। पेयजल संकट को लेकर झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में भी चिंता जताई गई थी। विधायकों ने पंचायत स्तर पर नए चापाकल लगाने की मांग की थी।

समाधान की जरूरत

गर्मी बढ़ने के साथ यह संकट और गहरा सकता है। ऐसे में खराब चापाकलों की जल्द मरम्मत और जलापूर्ति योजनाओं को समय पर पूरा करना बेहद जरूरी हो गया है।

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