DSPMU को मिला नया कुलपति, हड़ताल के बीच प्रो. राजीव मनोहर ने संभाला पदभार

Rupa Kumari | March 13, 2026 | 03:48 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची स्थित रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में शुक्रवार को नया नेतृत्व मिल गया। डॉ. राजीव मनोहर ने विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में पदभार संभाल लिया। उनकी एंट्री ऐसे समय हुई है जब विश्वविद्यालय में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की करीब 25 दिनों से हड़ताल जारी है। पदभार ग्रहण करते ही नए कुलपति ने कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया, जिससे कर्मचारियों के बीच समाधान की उम्मीद जगी है।

कुल सचिव ने किया स्वागत

पदभार ग्रहण के दौरान विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. धनंजय द्विवेदी मौजूद रहे। उन्होंने नए कुलपति का बुके देकर स्वागत किया और विश्वविद्यालय परिवार की ओर से शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि पिछले 25 दिनों से गैर-शैक्षणिक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एमएसीपी सहित कई लंबित मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्हें हड़ताल करनी पड़ी।

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आंदोलनरत कर्मचारियों से की बातचीत

पदभार संभालने के तुरंत बाद कुलपति प्रो. राजीव मनोहर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की परेशानियों को समझा जा रहा है और समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर लोक भवन और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर नियमों के अनुसार जल्द समाधान का प्रयास किया जाएगा।

बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाना प्राथमिकता

नए कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय परिवार के सभी लोग मिलकर ही संस्थान को आगे बढ़ा सकते हैं, इसलिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

रिसर्च और रोजगार पर रहेगा फोकस

प्रो. मनोहर ने विश्वविद्यालय में रिसर्च गतिविधियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शोध कार्यों से होती है, इसलिए DSPMU में शोध को और बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए ऐसे पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनसे पढ़ाई के बाद बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य सिर्फ डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों का भविष्य बेहतर बनाना भी होना चाहिए।

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