Samachar Post डेस्क, रांची : देश के संसदीय इतिहास में पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की पहल की गई है। विपक्षी दलों के करीब 193 सांसदों ने उनके खिलाफ निष्कासन प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। यह नोटिस शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जमा किया गया। जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
I.N.D.I.A गठबंधन के दल एकजुट
नोटिस पर हस्ताक्षर करने वालों में I.N.D.I.A गठबंधन के लगभग सभी दलों के सांसद शामिल हैं। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिसके कारण यह कदम उठाया गया है।
यह भी पढ़ें : सीएम हेमंत सोरेन ने 12 नए अत्याधुनिक थानों का किया शिलान्यास, पुलिस को सौंपे 1485 पेट्रोलिंग वाहन
सात गंभीर आरोप लगाए गए
विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त पर सात गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी गड़बड़ियों की जांच में बाधा बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना, जैसे आरोप शामिल हैं। खास तौर पर ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत कई असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
ममता बनर्जी ने भी जताई चिंता
इस मुद्दे पर ममता बनर्जी ने भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से असली मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, जिससे सत्ताधारी दल को फायदा हो सकता है।
हटाने की प्रक्रिया है जटिल
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी होती है। संविधान के अनुसार, उन्हें केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों, राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। मौजूदा प्रस्ताव में इससे कहीं अधिक सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है।
प्रस्ताव पारित होने के लिए जरूरी बहुमत
यदि यह प्रस्ताव संसद में पेश होता है, तो इसे पारित कराने के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा। जज (जांच) अधिनियम 1968 के तहत प्रस्ताव स्वीकार होने पर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति मिलकर एक जांच समिति गठित करेंगे, जो आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी।
बढ़ सकता है सियासी टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह की पहल पहली बार हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।