Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान झारखंड विधानसभा में JPSC की उम्र सीमा का मामला जोरशोर से उठाया गया। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि उम्र सीमा से जुड़े नियमों के कारण हजारों योग्य युवा अभ्यर्थी प्रतियोगिता से बाहर हो रहे हैं।
नौ साल में परीक्षा नहीं, युवा हो रहे वंचित
प्रदीप यादव ने सदन को बताया कि JPSC की विज्ञापन तिथि के अनुसार कट-ऑफ वर्ष 2018 निर्धारित किया गया है, जबकि उनके पास 2021 और 2023 के ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें कट-ऑफ क्रमशः 2016 और 2017 था। अब 2026 की तिथि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में JPSC की कोई नियमित परीक्षा नहीं हुई, जिससे कई योग्य उम्मीदवार उम्र सीमा के कारण आवेदन से वंचित हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अभ्यर्थी मजबूरी में झारखंड उच्च न्यायालय पहुंचे हैं और उन्हें कोर्ट से अनुमति भी मिली है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब छात्रों के मामलों पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए।
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सरकार गंभीर, सकारात्मक निर्णय की तैयारी
इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि JPSC उम्र सीमा के मुद्दे पर राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में गंभीर चर्चा की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो अभ्यर्थी उच्च न्यायालय नहीं गए हैं, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल करने पर सरकार विचार कर रही है। मंत्री ने कहा कि सरकार इस पूरे विषय को लेकर गंभीर है और अभ्यर्थियों के हित में सकारात्मक निर्णय लेने की दिशा में विचार-विमर्श चल रहा है।
युवाओं को राहत की उम्मीद
सदन में सरकार के इस आश्वासन के बाद JPSC अभ्यर्थियों को राहत की उम्मीद बंधी है। अब सभी की नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे हजारों युवाओं के भविष्य का रास्ता तय होगा।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।