झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पेसा नियमावली लागू करने में बाधाएं दूर करने का आदेश

Rupa Kumari | November 13, 2025 | 01:26 PM IST
  • हाईकोर्ट में हुई अवमानना याचिका पर सुनवाई

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान पंचायती राज विभाग के सचिव अदालत में सशरीर उपस्थित थे। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पेसा नियमावली का ड्राफ्ट कैबिनेट कोऑर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था, जिसने उसमें कुछ त्रुटियों की ओर संकेत किया। अब उन त्रुटियों को सुधारकर एक सप्ताह के भीतर संशोधित ड्राफ्ट फिर से कमेटी को भेजा जाएगा।

तीन सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। खंडपीठ ने याद दिलाया कि कोर्ट ने पहले ही 29 जुलाई 2024 को आदेश पारित कर सरकार को दो माह के भीतर नियमावली लागू करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इसे अधिसूचित नहीं किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली लागू करने में जो भी प्रशासनिक या तकनीकी बाधाएं हैं, उन्हें शीघ्र दूर किया जाए ताकि कानून का लाभ अनुसूचित क्षेत्रों तक पहुंचे। यह अवमानना याचिका आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से दायर की गई थी।

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हाईकोर्ट ने पहले भी दिया था आदेश

हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में ही राज्य सरकार को दो माह के अंदर नियमावली अधिसूचित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह नियमावली संविधान के 73वें संशोधन के उद्देश्यों और पेसा कानून के प्रावधानों के अनुरूप बनाई जानी चाहिए।
लेकिन आदेश के बावजूद अब तक पेसा नियमावली लागू नहीं की गई।

क्या है पेसा कानून?

पेसा (PESA) कानून, वर्ष 1996 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी परंपरागत ग्राम शासन प्रणाली को संवैधानिक मान्यता देना था। हालांकि, एकीकृत बिहार से लेकर झारखंड गठन (2000) के बाद तक भी राज्य सरकार ने कानून के तहत आवश्यक नियमावली तैयार नहीं की। वर्ष 2019 और 2023 में नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया गया, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। इस देरी के खिलाफ ही पहले जनहित याचिका और फिर अवमानना याचिका दायर की गई।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि “पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है। राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि इसे लागू करने में कोई देरी न हो।

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