Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में नर्सिंग होम और अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। यह याचिका झारखंड ह्यूमन राइट्स कन्फेडरेशन द्वारा दायर की गई है। सुनवाई के दौरान रिम्स की ओर से दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल मैनेजमेंट के लिए नया टेंडर जारी किया गया है। इसमें संबंधित कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। रिम्स कैंपस में ठोस, सूखा कचरा और बायोमेडिकल वेस्ट सहित सभी तरह के कचरे के निष्पादन का प्रावधान किया गया है।
कचरे को अलग रखने की व्यवस्था पर सवाल
हाई कोर्ट ने रिम्स से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या सामान्य कचरा और बायो मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग करने की व्यवस्था (सेग्रिगेशन) मौजूद है या नहीं।
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8 दिसंबर तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
कोर्ट ने कचरा निष्पादन से जुड़े इस टेंडर पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट 8 दिसंबर तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इससे पहले भी कोर्ट ने रिम्स में जगह-जगह कचरा फेंके जाने पर नाराजगी जताई थी और कचरा प्रबंधन पर स्पष्टीकरण मांगा था।
राज्य में कहां होते हैं वेस्ट का ट्रीटमेंट?
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोर्ट को जानकारी दी कि राज्य में वर्तमान में 5 स्थानों पर बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट कार्यरत हैं:
- लोहरदगा
- रामगढ़
- पाकुड़
- धनबाद
- आदित्यपुर
इसके अलावा देवघर में नया वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन है। बोर्ड ने सभी संचालित प्लांट को आवश्यक अनुमति प्रदान कर दी है।
याचिकाकर्ता की मांग
याचिका में मांग की गई है कि झारखंड में एन्कवायरमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिक से निकलने वाला खतरनाक बायो मेडिकल वेस्ट सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से निस्तारित हो सके।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।