Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग :हजारीबाग जिले के सदर प्रखंड के सिलवार खुर्द में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बना राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पिछले 13 वर्षों से बंद पड़ा है। 2012–13 में तैयार हुआ यह विशाल कैंपस आज खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है न क्लास, न शिक्षक, न प्राचार्य और न एक भी छात्र।
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13 साल में एक भी क्लास नहीं लगी
2012–13 में भवन निर्माण पूरा हो चुका है। आज तक कोई क्लास शुरू नहीं हुई। न फैकल्टी बहाली, न स्टाफ तैनाती हुई। हॉस्टल, लैब और क्लासरूम सभी बंद है। इमारतों में टूट-फूट शुरू हो चुकी है। सरकार ने 2023–24 सत्र के लिए नामांकन और संचालन का नोटिफिकेशन जारी किया था, लेकिन यह सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित रहा। तकनीकी शिक्षा विभाग और AICTE की वेबसाइटों पर कॉलेज को ‘संचालित’ दिखाया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह उलट है।
कैंपस का उपयोग प्रशिक्षण केंद्र के रूप में
कॉलेज शुरू न होने की वजह से वर्षों तक परिसर का उपयोग BSF, NCC और Home Guard के प्रशिक्षण के लिए किया गया।2024 में BSF स्थापना दिवस पर परिसर को अस्थायी रूप से ठीक कराया गया, लेकिन कार्यक्रम खत्म होते ही कैंपस फिर से उपेक्षा और जर्जरता में लौट आया।
हजारों छात्रों का भविष्य अटका
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कॉलेज शुरू हो जाए तो हजारीबाग और आसपास के जिलों के हजारों छात्र लाभान्वित होंगे। लेकिन आज स्थिति यह है कि विद्यार्थियों को पॉलिटेक्निक की पढ़ाई के लिए रांची, धनबाद, बोकारो या बिहार जाना पड़ता है। हजारीबाग में कोई निजी पॉलिटेक्निक कॉलेज भी नहीं है। करीब एक दशक से बंद पड़े इस सरकारी कॉलेज का विशाल भवन आज उपेक्षा, फाइलों की देरी और अव्यवस्था का प्रतीक बनकर खड़ा है।
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