झारखंड-यूपी में विवादों में TDPL, परीक्षा धांधली और भाई-भतीजावाद के आरोप; लखनऊ कार्यालय सील

Meenu | August 20, 2026 | 10:51 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) पर जांच का शिकंजा कसता जा रहा है। झारखंड CID ने लखनऊ स्थित कंपनी के कार्यालय में छापेमारी कर उसे सील कर दिया है। कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। कंपनी पर झारखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लग चुके हैं।

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लखनऊ कार्यालय में CID की छापेमारी

जानकारी के अनुसार, लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र में इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा स्थित आदर्श कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर TDPL का कार्यालय संचालित हो रहा था। कार्यालय दो कमरों में था। झारखंड CID की पांच सदस्यीय टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से तलाशी वारंट के आधार पर कार्यालय में कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। जांच के बाद कार्यालय को सील कर दिया गया। बताया गया है कि कंपनी का पंजीकृत कार्यालय पहले कानपुर में था, जिसे बाद में लखनऊ स्थानांतरित किया गया।

TDPL के निदेशकों पर भी कार्रवाई

भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान झारखंड CID ने TDPL के निदेशक रामबीर सिंह और कंपनी से जुड़े कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, दूसरे निदेशक सत्यपाल सिंह के फरार होने की बात सामने आई है। CID उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

2010 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

उपलब्ध कंपनी रिकॉर्ड के अनुसार, TDPL की स्थापना जुलाई 2010 में रामबीर सिंह, सत्यपाल सिंह और मोहम्मद तारिक ने की थी। वर्ष 2013 में मोहम्मद तारिक कंपनी से अलग हो गए। 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए दाखिल विवरण के मुताबिक रामबीर सिंह और सत्यपाल सिंह कंपनी के प्रमुख प्रमोटर हैं और दोनों की हिस्सेदारी 50-50 प्रतिशत बताई गई है।

2024-25 में कंपनी का राजस्व बढ़ा

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में संचालन से उसका राजस्व बढ़कर करीब 19.62 करोड़ रुपये हो गया, जबकि 2023-24 में यह करीब 5.23 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का शुद्ध लाभ करीब 48.54 लाख रुपये दर्ज किया गया। इसी अवधि में दोनों निदेशकों को 18.60-18.60 लाख रुपये वेतन मिलने की जानकारी दी गई है। कंपनी में कुल 965 कर्मचारियों के पंजीकृत होने का भी उल्लेख किया गया है।

यूपी विधानसभा सचिवालय भर्ती में भी उठे थे सवाल

TDPL का नाम उत्तर प्रदेश में हुई भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी विवादों में रहा है। वर्ष 2021-22 में उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद सचिवालयों में 186 पदों की भर्ती परीक्षा कराने वाली कंपनियों में TDPL भी शामिल थी। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में कई VIP और जांच अधिकारियों के करीबियों को लाभ मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के निदेशकों रामबीर सिंह और सत्यपाल सिंह के कम से कम पांच रिश्तेदार भी चयनित अभ्यर्थियों में शामिल थे। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे और CBI जांच का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के आदेश पर रोक लगा दी। मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में बताया जा रहा है।

ग्राम विकास अधिकारी भर्ती मामले में भी नाम

TDPL के निदेशकों का नाम उत्तर प्रदेश के 2019 ग्राम विकास अधिकारी भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में भी सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में मार्च 2021 में FIR दर्ज हुई थी और अप्रैल 2021 में रामबीर सिंह तथा सत्यपाल सिंह की गिरफ्तारी हुई थी। इन मामलों में लगे आरोपों की स्थिति और न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं।

चार अन्य कंपनियों में भी निदेशक

अदालती एवं सरकारी दस्तावेजों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, रामबीर सिंह और सत्यपाल सिंह TDPL के अलावा स्माइलिंग डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, एलकेओ फूड एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, केएसआर इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीमलॉजिक्स इन्फोटेक लिमिटेड से भी निदेशक के तौर पर जुड़े रहे हैं।

झारखंड में परीक्षा विवाद के बीच बढ़ी जांच

JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं को लेकर झारखंड में चल रहे विवाद के बीच TDPL के खिलाफ CID की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लखनऊ कार्यालय सील किए जाने और दस्तावेज जब्त किए जाने के बाद जांच एजेंसी कंपनी की भूमिका, परीक्षा संचालन से जुड़े रिकॉर्ड और संभावित अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है। फिलहाल जांच के निष्कर्ष और अदालत की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि कंपनी या उसके अधिकारियों की भूमिका किस स्तर तक रही है।

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