Samachar Post रिपोर्टर, रांची :JSSC पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक अस्थिरता और विवादों से जूझ रहा है। आयोग को पिछले छह साल से नियमित अध्यक्ष नहीं मिल पाया है, जिससे इसकी कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया, जिसमें 150 से अधिक अभ्यर्थियों और सॉल्वर गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी हुई। इससे पहले भी कई परीक्षाएं विवादों में रही हैं, जिससे आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
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अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम
फरवरी 2020 में तत्कालीन अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद से अब तक आयोग को स्थायी अध्यक्ष नहीं मिल सका है। फिलहाल प्रशांत कुमार को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। उनके पास वित्त और जल संसाधन विभाग की भी जिम्मेदारी है, जिससे कार्यभार और बढ़ गया है। आयोग में अध्यक्ष के अलावा दो सदस्य पद होते हैं, लेकिन वर्तमान में एक ही सदस्य कार्यरत हैं। दूसरे सदस्य का कार्यकाल दो महीने पहले समाप्त हो चुका है, जिससे निर्णय प्रक्रिया और प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों की राय: जल्द हो नियुक्ति
लगातार विवाद और स्थायी नेतृत्व की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं के निष्पक्ष संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। इससे छात्रों का भरोसा भी कमजोर हो रहा है और राज्य की छवि पर असर पड़ रहा है। जानकारों का मानना है कि आयोग के सुचारू संचालन के लिए एक सक्षम और पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति जरूरी है। इससे न सिर्फ परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सिस्टम पर भरोसा भी बहाल होगा।
पहले भी दिख चुका है ऐसा संकट
इससे पहले JPSC में भी अध्यक्ष पद लंबे समय तक खाली रहने से परीक्षाएं प्रभावित हुई थीं। ऐसे में JSSC के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है।
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