Samachar Post रिपोर्टर,पलामू :पलामू में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद अब पुलिस का फोकस नशीले पदार्थों की तस्करी और नए आपराधिक नेटवर्क पर केंद्रित हो गया है। अप्रैल 2024 में केंद्र सरकार द्वारा पलामू को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव शुरू हुआ। इसके बाद कई क्षेत्रों से सीआरपीएफ की तैनाती भी हटाई गई है, जिससे स्थानीय पुलिस अब नई चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रही है।
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पिकेट और कैंप की समीक्षा शुरू
नक्सल गतिविधियों में गिरावट के बाद पुलिस पिकेट और सुरक्षा कैंपों की उपयोगिता की समीक्षा की जा रही है। कुछ पिकेट को बंद करने या शैडो मोड में रखने पर विचार चल रहा है। इससे पहले भी कई पिकेट बंद किए जा चुके हैं। वर्ष 2007-08 से नक्सल विरोधी अभियान को मजबूत करने के लिए बूढ़ापहाड़ से लेकर बिहार और छत्तीसगढ़ सीमा तक 70 से अधिक कैंप और पिकेट स्थापित किए गए थे। इनकी वजह से नक्सली नेटवर्क और उनकी सप्लाई लाइन को कमजोर करने में बड़ी सफलता मिली थी।
ऑक्टोपस अभियान से मिली बड़ी सफलता
2022 में बूढ़ापहाड़ क्षेत्र में चलाए गए ‘ऑक्टोपस अभियान’ के दौरान नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए थे। इस अभियान से नक्सलियों की पकड़ कमजोर हुई और सुरक्षा बलों की मौजूदगी मजबूत हुई। नक्सल गतिविधियों में कमी के बाद अब पलामू, गढ़वा और लातेहार में अफीम और शराब तस्करी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। पुलिस अब इसी नए खतरे पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
तस्करों पर बड़े अभियान की तैयारी
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही नशा तस्करी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर नए पिकेट और निगरानी व्यवस्था भी स्थापित की जा सकती है। पलामू में नक्सलवाद कम होने के बाद अब अपराध का स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है, जिसके अनुसार रणनीति को लगातार अपडेट किया जा रहा है।
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