Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान विधायक हेमलाल मुर्मू ने अल्पसूचित प्रश्न के जरिए अपनी ही सरकार से राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, तो फिर राज्य में अपराध की घटनाएं कम क्यों नहीं हो रहीं। मुर्मू ने विशेष रूप से जेल से फरारी, नशीले पदार्थों की खेती और साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने संथाल परगना में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या वहां प्रशिक्षित और शिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है तथा क्या जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। यदि हां, तो उसका विस्तृत ब्योरा सदन में प्रस्तुत किया जाए।
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मंत्री का जवाब
सरकार की ओर से मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने दावा किया कि साइबर अपराध के 95 प्रतिशत मामलों में रिकवरी की गई है और अपराधियों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को नियमित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हालांकि, भाजपा विधायक नीरा यादव ने मंत्री के दावों पर सवाल उठाते हुए प्रस्तुत आंकड़ों को गलत बताया और सरकार से स्पष्ट आंकड़े देने की मांग की।
सदन में पेश किए गए आंकड़े
हेमलाल मुर्मू ने वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े सदन में रखते हुए कहा 2024 में साइबर अपराध के 1498 मामले दर्ज हुए। 919 लोगों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन कोई भी आरोपी दोषी सिद्ध नहीं हुआ, जबकि तीन लोग दोषमुक्त हुए। 2025 में 1413 मामले दर्ज हुए। 1268 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें केवल 37 आरोपी दोषी सिद्ध हुए और 387 लोग दोषमुक्त हो गए। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस सही तरीके से अनुसंधान कर साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत कर रही है, तो आरोपितों के दोषी सिद्ध होने की दर इतनी कम क्यों है। सदन में इस मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
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