Samachar Post रिपोर्टर,रांची :रांची में चल रहे बजट सत्र के तीसरे दिन प्रवासी मजदूरों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। विधायक जयराम महतो और अरूप चटर्जी ने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। जयराम महतो ने सदन में कहा कि राज्य में 16 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर कार्यरत हैं, लेकिन इनमें से केवल 1.91 लाख ही पंजीकृत हैं। उन्होंने पंजीकरण बढ़ाने और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग के गठन का सुझाव दिया।
सरकार का जवाब प्रक्रिया जारी
सरकार की ओर से जवाब देते हुए विभागीय मंत्री ने कहा कि मजदूरों के पंजीकरण के लिए काम चल रहा है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में प्रवासी मजदूर सूचना केंद्र संचालित है। मंत्री ने कहा कि मजदूर की मृत्यु होने पर फिलहाल 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। इसे बढ़ाकर 5 लाख करने की मांग पर मुख्यमंत्री से चर्चा कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
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भाषा और इलाज की समस्या पर विपक्ष की चिंता
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अन्य राज्यों में काम करने वाले मजदूरों को भाषा और चिकित्सा से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि चेन्नई, केरल और तमिलनाडु जैसे स्थानों पर ऐसे तंत्र विकसित किए जाएं, जिससे मजदूरों को मदद मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों की मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ जाते हैं, इसलिए बच्चों की शिक्षा और खाद्यान्न व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सहायता राशि और निदेशालय की मांग
विधायक अरूप चटर्जी ने प्रवासी मजदूरों के लिए अलग निदेशालय बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सामान्य मौत पर सहायता मिलती है, लेकिन आत्महत्या या अन्य परिस्थितियों में आर्थिक मदद नहीं दी जाती। मंत्री ने जवाब में बताया कि पांच राज्यों में प्रवासी सहायता केंद्र खोलने और अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया जारी है। आत्महत्या के मामलों में सहायता पर भी विचार किया जाएगा।
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