Samachar Post डेस्क, बिहार : बिहार में माओवाद के खिलाफ बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अभियान तेज कर दिया है। बीते एक साल में STF ने 150 से अधिक माओवादियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई इनामी नक्सलियों ने दबाव में आकर आत्मसमर्पण किया है। पुलिस का दावा है कि इस सघन कार्रवाई से माओवादियों की गतिविधियां सीमित होकर झारखंड से सटे इलाकों तक सिमट गई हैं।
उत्तर बिहार नक्सलमुक्त, दक्षिणी इलाकों में दबाव
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, मुंगेर, लखीसराय और जमुई जैसे इलाकों में STF की लगातार कार्रवाई का असर साफ दिख रहा है। उत्तर बिहार को पहले ही नक्सलमुक्त घोषित किया जा चुका है, जबकि दक्षिणी जिलों में माओवादियों पर शिकंजा कसता जा रहा है।
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गिरफ्तारी में तीन गुना तक बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में 44 माओवादी गिरफ्तार किए गए थे। वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 134 तक पहुंच गई। इसके अलावा, फरवरी 2026 तक करीब दो दर्जन माओवादी और पकड़े जा चुके हैं। बीते एक साल में माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार लगभग तीन गुना बढ़ी है।
इनामी कमांडरों का आत्मसमर्पण
मुंगेर के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में लंबे समय से माओवाद की समस्या रही है। यहां STF ने अर्द्धसैनिक बलों के सहयोग से अभियान चलाया। इसी दबाव का नतीजा रहा कि 28 दिसंबर 2025 को तीन माओवादी कमांडर बहादुर कोड़ा, नारायण कोड़ा और बिनोद कोड़ा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से दो इंसास राइफल, चार एसएलआर, 500 राउंड गोलियां और 10 वॉकी-टॉकी बरामद हुए थे।
झारखंड की ओर खिसके दस्ते
जुलाई 2025 में अतिसक्रिय नक्सली दस्ते के सदस्य भोला कोड़ा उर्फ विकास उर्फ रोहित कोड़ा ने भी मुंगेर में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस के मुताबिक, मुंगेर में लगातार चल रही कार्रवाई से माओवादी दस्तों ने अन्य इलाकों में शरण ली, जिसके बाद झारखंड के कई क्षेत्रों में मुठभेड़ें हुईं। इन मुठभेड़ों में प्रवेश दा उर्फ सहदेव सोरेन, अरविंद यादव उर्फ आलोक जी उर्फ नेता जी, टुन्नी लाल उर्फ टुनटुन समेत अन्य माओवादी मारे गए।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।