Samachar Post रिपोर्टर,जमशेदपुर :राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि लोकभवन का द्वार झारखंड के हर नागरिक के लिए हमेशा खुला है। यह भवन आम जनता के हितों का संरक्षक और जनजातीय भाषाओं, लोक कला व सांस्कृतिक आयोजनों के संरक्षण में निरंतर सहयोगी रहेगा।
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महोत्सव: संस्कृति और सामुदायिक एकता का उत्सव
राज्यपाल जमशेदपुर में आयोजित ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, भाषा और संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, यह भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति है। इसे विकसित भारत 2047 की समावेशी विकास भावना का प्रतीक बताया।
संताली भाषा और ओलचिकी लिपि का गौरवशाली सफर
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 2003 में संताली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल किया। उस समय राज्यपाल अटल कैबिनेट के सदस्य भी थे। पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा रचित ओलचिकी लिपि को संथाली समाज की सांस्कृतिक गरिमा और पहचान का प्रतीक बताया कहा इस लिपि ने शिक्षा, साहित्य, शोध और अकादमिक विकास को मजबूत आधार दिया।
राष्ट्रपति के आगमन से समारोह बना ऐतिहासिक
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन राज्य के लिए गर्व और उत्साह का क्षण है। उन्हें सामाजिक न्याय, जनजातीय उत्थान और महिला सशक्तिकरण की जीवंत प्रतीक बताया कहा उनके आने से यह समारोह ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बन गया है। राज्यपाल बोले यह वही धरती है जहां जमशेदजी टाटा ने औद्योगिक विकास के साथ सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रखी थी। आज यह समारोह उसी एकता, अस्मिता और समावेशी विकास की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
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