झारखंड में 13 लाख राशन लाभुक परेशान, दो महीने से नहीं मिल रहा टेक होम राशन

Rupa Kumari | December 26, 2025 | 11:27 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में पिछले दो महीने से करीब 13 लाख लाभुकों को टेक होम राशन (THR) नहीं मिल पा रहा है। कई जिलों में यह आपूर्ति तीन से चार महीने से पूरी तरह बंद है। अधिकारियों के अनुसार, पुराने आपूर्तिकर्ता का अनुबंध समाप्त होने और नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर सीधा असर

टेक होम राशन योजना के तहत राज्य में गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत 1.66 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएं, 1.17 लाख से ज्यादा धात्री महिलाएं और करीब 10.5 लाख छोटे बच्चे लाभुक हैं। राशन की आपूर्ति बंद होने से आंगनबाड़ी केंद्रों में महिलाओं और बच्चों को नियमित पोषाहार नहीं मिल पा रहा है।

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कुपोषित बच्चों की बढ़ी चिंता

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस स्थिति को गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सबसे अधिक परेशानी गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को हो रही है, जिन्हें अतिरिक्त पोषण की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार झारखंड में कुपोषण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राज्य में 39.6 प्रतिशत बच्चे बौनेपन, 22 प्रतिशत बच्चे कम वजन और 67.5 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं।

20 जनवरी के बाद आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद

सरकार ने टेक होम राशन की आपूर्ति दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद पुराने तीन आपूर्तिकर्ताओं को अगले नौ महीने के लिए राशन आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार 20 जनवरी के बाद टेक होम राशन की आपूर्ति फिर से शुरू होने की संभावना है।

किशोरियों को भी मिलेगा टेक होम राशन

टेक होम राशन में दाल, मूंगफली, गुड़ और स्थानीय अनाज से बना फोर्टिफाइड सूखा राशन शामिल होता है, जिसे लाभुक घर ले जाकर उपयोग करते हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना है। इसके साथ ही सरकार ने 14 से 18 वर्ष की कुपोषित किशोरियों को भी टेक होम राशन देने का फैसला किया है। इनकी संख्या करीब 1.5 लाख बताई जा रही है। नए साल के पहले महीने में इसकी आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।

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