रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी, दो और लोगों की कुचलकर मौत, तीन दिन में छह की गई जान

Meenu | December 20, 2025 | 03:11 PM IST


Samachar Post रिपोर्टर,रामगढ़ :रामगढ़ जिले में जंगली हाथियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को अलग-अलग इलाकों में हाथियों के हमले में दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे जिले में दहशत का माहौल और गहरा गया है। बीते तीन दिनों में हाथियों के हमले से अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है। पहली घटना कुजू वन क्षेत्र की है। करमा (सुगिया) प्रोजेक्ट स्थित पीट ऑफिस के पास कोयला चुनने गए सुगिया गांव निवासी लोकनाथ मुंडा (40) पर हाथियों ने हमला कर दिया। हाथियों ने उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दूसरी घटना रामगढ़ वन क्षेत्र के कुंदरू सरैया इलाके की है। यहां एक ईंट भट्ठे पर काम कर रही काजल देवी (32) पर हाथियों ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल काजल देवी की भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

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तीन दिन में छह मौतों से इलाके में दहशत

दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। रेंजर बटेश्वर पासवान ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों को तत्काल 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। गौरतलब है कि इससे पहले 17 दिसंबर को वेस्ट बोकारो ओपी क्षेत्र में हाथियों के हमले में दो महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह महज तीन दिनों में हाथियों के हमलों से रामगढ़ जिले में कुल छह लोगों की जान जा चुकी है।

झुंड से भटके हाथियों को वापस लाने की कोशिश

वन विभाग के रेंजर बटेश्वर पासवान ने बताया कि कुछ हाथी अपने झुंड से भटक गए हैं। उन्हें चिन्हित कर दोबारा झुंड से मिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि हाथियों के दिखने पर उनसे दूरी बनाए रखें, उन्हें उकसाने की कोशिश न करें और तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।

स्कूलों पर भी पड़ा हाथियों के आतंक का असर

हाथियों के हमले का असर क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। 17 दिसंबर को चार लोगों की मौत के बाद सरस्वती शिशु मंदिर आरा को बंद कर दिया गया था। वहीं 17 और 18 दिसंबर को राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुंदरिया भी बंद रहा। शुक्रवार को स्कूल तो खोला गया, लेकिन भय के कारण केवल 20 से 25 बच्चे ही उपस्थित हुए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुमन गुप्ता ने बताया कि 16 दिसंबर को एक हाथी ने स्कूल के स्टोर रूम का दरवाजा तोड़ दिया था और वहां रखी चार बोरी चावल खा गया था। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया था।

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