Samachar Post रिपोर्टर,रांची :महिला सुपरवाइजरों के 421 पदों पर नियुक्ति मामले में आकांक्षा कुमारी सहित अन्य अभ्यर्थियों की याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई। न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने मामले को सक्षम हाईकोर्ट की खंडपीठ में भेज दिया है, जो अब अंतिम फैसला सुनाएगी कि क्या कोई पद 100% महिलाओं के लिए आरक्षित किया जा सकता है या नहीं। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और चंचल जैन ने पक्ष रखा। जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने बहस की। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने महिला सुपरवाइजर पद को सिर्फ महिला कैडर के लिए रखा जा सकता है या नहीं, इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।
मुख्य विवाद का मुद्दा
महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि महिला सुपरवाइजर पद विशेष टारगेटेड समूह (गर्भवती महिला, नवजात शिशु को जन्म देने वाली महिला आदि) के लिए बनाया गया है, और इसका कार्य भी महिलाओं से जुड़ा है। इसलिए यह पद सिर्फ महिला कैडर के लिए होना चाहिए। वहीं, प्रार्थियों की ओर से तर्क दिया गया कि नियुक्ति में किसी वर्ग को 100% आरक्षण नहीं दिया जा सकता। पद के लिए केवल महिलाओं से आवेदन मांगे जाने पर भी यह चुनौती उठाई गई।
जेएसएससी का विज्ञापन और चयन विवाद
जेएसएससी ने बाल कल्याण विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। प्रार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया, लेकिन चयन नहीं हो सका। आयोग का तर्क था कि प्रार्थियों की शैक्षणिक योग्यता विज्ञापन में निर्धारित मुख्य विषय के अनुरूप नहीं है, जबकि प्रार्थियों के पास सहायक विषयों की डिग्री है। सुनवाई के दौरान अदालत ने नियुक्ति पर लगाई गई रोक अगले आदेश तक जारी रखी। अब खंडपीठ इस मामले में अंतिम फैसला सुनाएगी।
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