शिवचंद्र राम को मनाने में जुटी राजद, इस्तीफा किया नामंजूर; MLC टिकट को लेकर बढ़ी थी नाराजगी

Rupa Kumari | June 9, 2026 | 02:38 PM IST

Samachar Post डेस्क, पटना : बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम द्वारा दिए गए इस्तीफे को पार्टी नेतृत्व ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। राजद ने उनके इस्तीफे को नामंजूर करते हुए उन्हें मनाने और संगठन में बनाए रखने की कवायद तेज कर दी है।

टिकट नहीं मिलने पर सार्वजनिक रूप से जताई थी नाराजगी

सोमवार को शिवचंद्र राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इस दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि वह वर्ष 1990 से लगातार राजद और उसके नेतृत्व के साथ जुड़े रहे हैं तथा पार्टी के हर निर्णय का सम्मान करते हुए संगठन को मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा था कि उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पार्टी की सेवा की, लेकिन हालिया घटनाक्रम से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। प्रेस वार्ता के दौरान वह भावुक होकर रो भी पड़े थे।

सुनील सिंह को टिकट मिलने से बढ़ी नाराजगी

दरअसल, बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए राजद ने सुनील सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। टिकट की दौड़ में शिवचंद्र राम का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जा रहा था। अंतिम सूची में नाम नहीं आने के बाद उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए संगठन के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया था।

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डैमेज कंट्रोल में जुटा पार्टी नेतृत्व

शिवचंद्र राम के इस्तीफे के बाद राजद नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पार्टी ने उनका इस्तीफा अस्वीकार करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अनुभवी नेताओं को साथ लेकर चलना चाहती है। राजनीतिक जानकार इसे राजद की डैमेज कंट्रोल रणनीति के रूप में देख रहे हैं। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि पार्टी नेतृत्व शिवचंद्र राम की नाराजगी दूर करने के लिए आगे क्या कदम उठाता है और उन्हें संगठन में किस तरह की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

संगठनात्मक एकजुटता पर राजद का जोर

विधान परिषद चुनाव के बीच पार्टी किसी भी तरह के अंदरूनी असंतोष को सार्वजनिक विवाद में बदलने से बचना चाहती है। ऐसे में शिवचंद्र राम को मनाने की कोशिशों को संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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