Samachar Post रिपोर्टर, सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा स्थित समाहरणालय परिसर, जो कभी बंजर जमीन के रूप में जाना जाता था, आज हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की एक शानदार मिसाल बन चुका है। जहां पहले सूखी और खाली पड़ी जमीन थी, वहीं अब हरी-भरी फसलें और आकर्षक गार्डन लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इस परिवर्तन के पीछे उपायुक्त कंचन सिंह का मार्गदर्शन, सतत निगरानी और टीम का सामूहिक प्रयास प्रमुख भूमिका में रहा है।
बंजर जमीन से हरियाली तक का सफर
उपायुक्त के नेतृत्व में समाहरणालय परिसर को सिर्फ सुंदर ही नहीं बनाया गया, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण का एक मॉडल भी विकसित किया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जा रहा है।
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सौर ऊर्जा और जल संरक्षण की अनोखी पहल
परिसर में आधुनिक सुविधाओं को भी जोड़ा गया है, जिसमें शामिल हैं सौर ऊर्जा से संचालित लाइटें, जल संरक्षण की विशेष व्यवस्था, सुव्यवस्थित गार्डन और हरित क्षेत्र ये पहल न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ा रही हैं, बल्कि सतत विकास की दिशा में भी एक मजबूत कदम हैं।
लोगों के लिए बना प्रेरणा का केंद्र
आज सिमडेगा समाहरणालय परिसर यह संदेश दे रहा है कि अगर सोच सकारात्मक हो और प्रयास ईमानदार हों, तो किसी भी बंजर जमीन को हरियाली में बदला जा सकता है। यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों और संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।