Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड सरकार अब विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी पर सख्ती करने जा रही है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार एक नया कानून लाने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित कानून का नाम ‘झारखंड ओवरसीज इम्प्लॉयमेंट (रेगुलेशन, फैसिलिटेशन एंड वेलफेयर) एक्ट’ रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड के श्रमिकों को विदेश में रोजगार के नाम पर हो रही ठगी और शोषण से बचाना है। साथ ही उन्हें कानूनी और सुरक्षित प्रक्रिया के तहत नौकरी दिलाना है।
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किन इलाकों पर रहेगा खास फोकस
राज्य के हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह और संताल परगना जैसे जिलों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए खाड़ी देशों और अन्य देशों में जाते हैं। ऐसे में यह कानून खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के श्रमिकों के लिए राहत लेकर आएगा।
फर्जी एजेंसियों और बिचौलियों पर सख्ती
कई मामलों में देखा गया है कि एजेंसियां और बिचौलिए गलत जानकारी देकर लोगों को विदेश भेज देते हैं। नए कानून के तहत सभी भर्ती एजेंसियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस कोई भी एजेंसी श्रमिकों को विदेश नहीं भेज सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार इस कानून के जरिए विदेश जाने वाले श्रमिकों का एक संगठित डाटाबेस तैयार करेगी। इससे आपात स्थिति जैसे अंतरराष्ट्रीय संकट या युद्ध के समय श्रमिकों की पहचान और मदद करना आसान होगा।
जल्द विधानसभा में पेश होने की संभावना
यह प्रस्तावित कानून केंद्र सरकार के प्रवासन अधिनियम, 1983 के साथ समन्वय बनाकर काम करेगा। राज्य स्तर पर यह कानून एक मजबूत ढांचा तैयार करेगा, जिससे श्रमिकों की सुरक्षा और निगरानी बेहतर तरीके से हो सके। फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है, लेकिन इसे जल्द अंतिम रूप देकर विधानसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस कानून के लागू होने से विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी पर काफी हद तक रोक लगेगी।
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