Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में “कट-कमीशन” की सरकार चल रही है, जहां केंद्र से आने वाले विकास के पैसों पर मंत्री, बिचौलिया और अधिकारी की नजर है। उन्होंने अपने बयान में “सीसी” का मतलब कट-कमीशन और “एमबीए” का मतलब मंत्री, बिचौलिया और अधिकारी बताया।
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केंद्र के फंड पर गड़बड़ी की आशंका
भानु प्रताप शाही ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा झारखंड के ग्रामीण विकास के लिए 2254 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों के झारखंड के निर्माण के लिए है। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि राज्य सरकार में शामिल लोग इस पैसे में भी कट-कमीशन की सोच रख रहे हैं, जिससे गांवों के विकास पर असर पड़ सकता है।
मंत्री और सरकार पर सीधे आरोप
उन्होंने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर इस योजना में भी कट-कमीशन की सोच हावी रही, तो ग्रामीणों की स्थिति और खराब हो जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाली राशि के लिए कभी धन्यवाद तक नहीं देती, जबकि लगातार केंद्र पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाती रहती है।
योजनाओं में देरी और फंड सरेंडर पर सवाल
भानु प्रताप शाही ने राज्य सरकार पर केंद्र की योजनाओं को लागू करने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने करीब 30 हजार करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड को 2.48 लाख आवास मिले, लेकिन राज्य में इसकी प्रगति बहुत धीमी है।
‘अबुआ आवास’ और जल योजनाओं पर भी उठाए सवाल
उन्होंने राज्य सरकार की ‘अबुआ आवास योजना’ को भी निशाने पर लिया और कहा कि अब तक एक भी आवास पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। साथ ही, नल-जल योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह टंकियां तो लग गई हैं, लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा। उनका आरोप है कि केंद्र की योजनाओं के पैसे का सही उपयोग नहीं हो रहा।
आंदोलन की चेतावनी
भानु प्रताप शाही ने कहा कि यदि केंद्र से भेजी गई राशि में किसी भी तरह की गड़बड़ी या कट-कमीशन की पुष्टि होती है, तो भारतीय जनता पार्टी इसके खिलाफ आंदोलन करेगी। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों के लिए भेजे गए फंड के सही उपयोग की मांग भी की।
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