Samachar Post रिपोर्टर, रांची: रांची की हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड एक बार फिर विवादों में है। कर्मचारी राज्य बीमा ने कंपनी को डिफॉल्टर घोषित करते हुए बकाया राशि जल्द जमा करने को कहा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ESI के डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र टुडू ने HEC प्रबंधन से बातचीत कर अस्थायी कर्मियों से जुड़ा पूरा लेखा-जोखा जमा करने का निर्देश दिया है। HEC कर्मचारियों को पिछले करीब 26 महीनों से नियमित वेतन नहीं मिल रहा है। कभी दो महीने तो कभी तीन महीने के अंतराल पर भुगतान होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
500 अस्थायी कर्मियों पर सबसे ज्यादा असर
सबसे अधिक असर करीब 500 अस्थायी कर्मचारियों पर पड़ा है। इनके वेतन से हर महीने ESI के नाम पर राशि काटी जा रही है, लेकिन जमा नहीं होने के कारण पिछले लगभग नौ महीनों से उन्हें ESI के तहत इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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अस्पताल से लौटाए जा रहे कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि ESI अस्पताल पहुंचने पर डेटा अपडेट नहीं होने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि पैसे कटने के बावजूद सुविधा नहीं मिलना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारी निजी अस्पताल में इलाज कराने में असमर्थ हैं। कई लोग इलाज टालने को मजबूर हैं, जबकि कुछ कर्ज लेकर दवाइयां खरीद रहे हैं। इसका असर परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
कंपनी मुख्यालय में यह जांच की जा रही है कि ESI मद में काटी गई राशि जमा क्यों नहीं हुई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कंपनी से भुगतान मिलने के बाद किन संवेदकों ने राशि जमा नहीं की। सालवार हिसाब तैयार किया जा रहा है। अस्थायी कर्मचारियों ने कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन करेंगे। वहीं ESI अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जल्द ही इलाज की सुविधा बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।