Samachar Post डेस्क, रांची :आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक अहम संगठनात्मक फैसला लेते हुए राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजा है। इसमें पार्टी ने अपने डिप्टी लीडर राघव चड्ढा को पद से हटाने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि उन्हें अब पार्टी के कोटे से सदन में बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सक्रिय भूमिका
AAP ने अपने पत्र में अशोक मित्तल को डिप्टी लीडर बनाने की सिफारिश की है। वे अप्रैल 2022 से राज्यसभा सदस्य हैं और रक्षा व वित्त जैसी महत्वपूर्ण संसदीय समितियों से जुड़े रहे हैं। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कनीमोझी के नेतृत्व में रूस, लातविया, स्लोवेनिया, ग्रीस और स्पेन के दौरे पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भी अशोक मित्तल शामिल थे। इससे उनकी सक्रियता और अनुभव को लेकर पार्टी का भरोसा साफ झलकता है।
राघव चड्ढा का संसदीय रिकॉर्ड
राघव चड्ढा अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद हैं और उन्होंने संसद में कई अहम मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने पंचायतों में ‘सरपंच पति’ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए महिला प्रतिनिधियों के अधिकारों को मजबूत करने की मांग की थी। इसके अलावा, उन्होंने मेंस्ट्रल हाइजीन जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया और इसे स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा और समानता से जुड़ा विषय बताया। राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की स्थिति को समझने के लिए उनके साथ समय बिताया और उनकी आय, सुरक्षा व कार्य परिस्थितियों को लेकर संसद में आवाज उठाई।
सियासी मायने: क्या बदल रहे हैं समीकरण?
AAP का यह कदम सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। पार्टी के एक प्रमुख चेहरे को इस तरह हटाने की मांग ने अंदरूनी समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में इसका असर पार्टी और संसद की राजनीति दोनों में देखने को मिल सकता है।
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