Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले सिमडेगा कॉलेज और मांडर कॉलेज में नागपुरी भाषा के यूजी और पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं, लेकिन इन दोनों संस्थानों में एक भी स्थायी या नीड-बेस्ड शिक्षक की नियुक्ति नहीं है। यह स्थिति न केवल छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्रीय भाषा नागपुरी के संरक्षण और संवर्धन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
शहर और दूरदराज इलाकों में असंतुलन
जहां डोरंडा कॉलेज में दो स्थायी और दो नीड-बेस्ड शिक्षक कार्यरत हैं, वहीं सिमडेगा और मांडर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित हैं। यह स्थिति प्रशासनिक असंतुलन और नीति-निर्माण में समन्वय की कमी को दर्शाती है। ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की उपलब्धता पहले से ही सीमित है। ऐसे में विषय तो शुरू कर देना, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति न करना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ समझौते जैसा माना जा रहा है।
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नई नियुक्ति पर उठते सवाल
विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में पहले से एक स्थायी और दो नीड-बेस्ड शिक्षक कार्यरत हैं। इसके बावजूद हाल ही में डॉ. मनोज कच्छप की नियुक्ति की गई। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह नियुक्ति उन कॉलेजों की तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखकर की गई, जहां शिक्षक का अभाव है? विशेषज्ञों का मानना है कि संसाधनों का संतुलित वितरण आवश्यक है, ताकि दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिल सकें।
नागपुरी : भाषा से बढ़कर सांस्कृतिक अस्मिता
नागपुरी केवल एक विषय नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक चेतना की वाहक है। लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक कथाएं और सामाजिक इतिहास इस भाषा में ही जीवंत हैं। यदि इसके अध्ययन-अध्यापन की बुनियादी संरचना मजबूत नहीं होगी, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जाएंगी।
क्या हो समाधान?
सिमडेगा और मांडर कॉलेज में शीघ्र स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति आवश्यकता के अनुसार गेस्ट फैकल्टी की अस्थायी व्यवस्था क्षेत्रीय भाषाओं के लिए विशेष बजट और निगरानी तंत्र, ग्रामीण कॉलेजों के लिए समान शैक्षणिक नीति नागपुरी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए केवल पाठ्यक्रम चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत शैक्षणिक ढांचा और प्रशिक्षित शिक्षक भी उतने ही आवश्यक हैं।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।