Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी (ILS) में नए शैक्षणिक सत्र के दाखिलों पर झारखंड हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई सुनवाई के बाद जारी किया गया। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
याचिका में उठे गंभीर सवाल
यह मामला अंबेश कुमार चौबे और अन्य की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान संस्थान की मान्यता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। हाई कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि संस्थान की सभी कमियों को दूर कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा हालात में नए दाखिलों की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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बार काउंसिल के निर्देशों की अनदेखी
अदालत को बताया गया कि बार काउंसिल की ओर से संस्थान को कई बार सुधार के निर्देश दिए गए, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ। अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने इस पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। जानकारी दी गई कि बार काउंसिल ने कॉलेज को छह महीने का समय दिया है ताकि सभी खामियां दूर की जा सकें, अन्यथा मान्यता रद्द की जा सकती है। इससे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शिक्षकों और सुविधाओं की कमी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि संस्थान में स्थायी शिक्षकों की भारी कमी है। नियम के अनुसार कम से कम 10 स्थायी प्रोफेसर होने चाहिए, लेकिन यहां अंशकालिक शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई चल रही है। साथ ही लाइब्रेरी, खेल मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया गया। मामले में यह भी कहा गया कि कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर लॉ विषय के बजाय समाजशास्त्र के प्रोफेसर कार्यरत हैं, जो नियमों के अनुरूप नहीं है। विश्वविद्यालय ने अदालत को बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन पद स्वीकृत नहीं हो सके हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह संस्थान स्व-वित्तपोषित है।
छात्रों की पढ़ाई पर असर
फिलहाल संस्थान में करीब 418 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। प्रबंधन की ओर से बताया गया कि छोटानागपुर लॉ कॉलेज के साथ एमओयू के तहत कुछ शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।