Samachar Post रिपोर्टर,पूर्वी सिंहभूम :झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में सुवर्णरेखा नदी तट पर द्वितीय विश्व युद्ध काल का 227 किलोग्राम वजनी बम मिला है। यह अनएक्सप्लोडेड ऑर्डिनेंस (UXO) दशकों बाद भी बेहद घातक बना हुआ है। इस खतरनाक बम को निष्क्रिय करने के लिए बुधवार को भारतीय सेना द्वारा हाई-रिस्क डिफ्यूज ऑपरेशन चलाया जाएगा। इसके लिए सेना की विशेष बम निरोधक टीम पहले ही मौके पर पहुंच चुकी है और पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है।
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सेना की स्पेशल टीम तैनात
लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह, कैप्टन आयुष कुमार और नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह के नेतृत्व में बम निरोधक दस्ता तकनीकी जांच में जुटा रहा। टीम ने पूरे दिन ऑपरेशन की रणनीति पर काम किया। डिफ्यूज ऑपरेशन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं विस्फोट स्थल के 1 किलोमीटर दायरे को खाली कराया गया। पूरे क्षेत्र में नो-एंट्री लागू, तारों से बैरिकेडिंग और झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा के गांवों को अलर्ट कराया गया है।
कैसे किया जाएगा बम निष्क्रिय?
बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के लिए उसके चारों ओर बालू भरी बोरियों का घेरा बनाया गया है। करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में बम को स्थापित किया गया। संभावित विस्फोट को जमीन के अंदर सीमित रखने की तैयारी है। यह पूरा ऑपरेशन रिमोट सिस्टम के जरिए करीब एक किलोमीटर दूरी से संचालित किया जाएगा, ताकि जोखिम को कम किया जा सके। ऑपरेशन के दौरान क्षेत्र में किसी भी प्रकार की हवाई गतिविधि पर रोक रहेगी। एयरफोर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है और विस्फोट के समय कोई विमान या हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भरेगा।
कैसे हुई बम की पहचान?
करीब आठ दिन पहले स्थानीय लोगों ने इस बम को देखा था। जांच में पाया गया कि इस पर “AN-M64 500-LB American Made Unexploded (UXO)” अंकित है, जो इसे द्वितीय विश्व युद्ध काल का बम साबित करता है। पूरे इलाके की नजर अब सेना के इस संवेदनशील ऑपरेशन पर है। ऑपरेशन सफल होने के बाद दशकों से दबा यह खतरनाक बम पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाएगा।
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