रांची में शराब विक्रेताओं की बढ़ी परेशानी, ETD वृद्धि और अव्यवहारिक लक्ष्य पर सरकार से राहत की मांग

Rupa Kumari | March 28, 2026 | 01:44 PM IST
  • वाइन रिटेलर्स एसोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाई आवाज, कहा अब मुनाफे नहीं, अस्तित्व की लड़ाई

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में शराब कारोबार से जुड़े खुदरा विक्रेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वाइन रिटेलर्स एसोसिएशन ने शनिवार को प्रेस क्लब रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्पाद परिवहन शुल्क (ETD) में बढ़ोतरी और अव्यवहारिक राजस्व लक्ष्यों को लेकर सरकार से राहत की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि रांची जिले में ETD में अन्य जिलों की तुलना में अधिक बढ़ोतरी की गई है। इससे स्थानीय खुदरा विक्रेताओं को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ रहा है और व्यापार प्रभावित हो रहा है।

राजस्व लक्ष्य ‘असंभव’, MGQR वृद्धि से दबाव

विक्रेताओं ने 2025-26 और 2026-27 के लिए तय राजस्व लक्ष्यों को अव्यवहारिक बताया है। उनका कहना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करना संभव नहीं है। साथ ही 2026-27 के लिए MGQR (मिनीमम गारंटेड क्वांटिटी रिक्वायरमेंट) में 10% वृद्धि को उद्योग के लिए “अंतिम दबाव” बताया गया है। एसोसिएशन के अनुसार बाजार में सुस्ती के कारण स्टॉक उठाने में करीब 40 दिन लग रहे हैं, जबकि विभाग की ओर से देरी पर जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके अलावा MGR से जुड़े कोटा को भी रोका जा रहा है, जिससे कारोबार और प्रभावित हो रहा है।

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अवैध बिक्री पर भी उठे सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा कैंटीन के स्टॉक के खुले बाजार में अवैध रूप से बिकने का मुद्दा भी उठाया गया। विक्रेताओं ने कहा कि इससे लाइसेंसधारी दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने मासिक कोटा प्रणाली की जगह तिमाही कोटा लागू करने की मांग की है, ताकि बाजार की वास्तविक मांग के अनुसार स्टॉक उठाव किया जा सके और अनावश्यक दबाव से राहत मिल सके।

अब मुनाफा नहीं, अस्तित्व का सवाल

विक्रेताओं का कहना है कि वर्तमान में करोड़ों रुपये का स्टॉक बिना बिके पड़ा है। ऐसे में बढ़े हुए शुल्क और कठोर लक्ष्यों के बीच व्यापार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ETD में समानता और राजस्व लक्ष्यों में सुधार नहीं किया गया, तो कारोबार जारी रखना कठिन हो जाएगा।

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