Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा :जामताड़ा के आदिवासी बहुल इलाकों में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाहों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि गोपालपुर पंचायत और आसपास के गांवों में ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। अफवाहों के कारण पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
स्कूलों में 10% तक घटी बच्चों की हाजिरी
कुछ दिन पहले दूध कैबरा गांव में बच्चा चोरी की अफवाह फैलने के बाद दहशत और बढ़ गई। इसका सीधा असर स्कूलों पर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को इस मुद्दे पर पूर्व मुखिया मनोज सोरेन की अध्यक्षता में बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अफवाहों पर रोक लगाने और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जामताड़ा की सीमा पश्चिम बंगाल से सटी होने के कारण बाहरी और अज्ञात लोगों की आवाजाही बनी रहती है। हाल ही में एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ने और उसके पास से संदिग्ध सामग्री मिलने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
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स्कूल सुरक्षा पर सवाल
बैठक में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। बताया गया कि गोपालपुर पंचायत के 10 स्कूलों में से 8 में बाउंड्री वॉल नहीं है। कई विद्यालयों तक पहुंचने का रास्ता घने जंगलों से होकर गुजरता है, जिससे अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में डर महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पश्चिम बंगाल सीमा पर सघन जांच अभियान चलाया जाए। क्षेत्र में घूम रहे अज्ञात और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों या आश्रय गृह भेजा जाए। जागरूकता अभियान तेज किया जाए, ताकि अफवाहों के कारण मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं न हों। बैठक में निर्णय लिया गया कि ग्रामीण टोला-टोला जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और अफवाहों से बचने की अपील करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे जरूरी है अफवाहों पर ध्यान न देना और किसी भी संदिग्ध सूचना की पुष्टि प्रशासन से करना।
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