Samachar Post रिपोर्टर,जामताड़ा :झारखंड के जामताड़ा जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। पिछले 8 महीनों से फंड आवंटन नहीं होने के कारण हजारों बच्चों को मिलने वाला पौष्टिक आहार अंडा उनकी थाली से गायब हो गया है। इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिले में कुल 1,189 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां करीब 32,000 बच्चे पोषण और शिक्षा से जुड़े हैं।सरकारी नियमों के अनुसार, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए नियमित रूप से अंडा देना अनिवार्य है, लेकिन अगस्त 2025 से फंड बंद होने के कारण यह व्यवस्था ठप हो गई है।
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उधार से चल रही थी व्यवस्था, अब पूरी तरह ठप
शुरुआती महीनों में आंगनबाड़ी सेविकाओं ने स्थानीय दुकानदारों से उधार लेकर बच्चों को अंडे उपलब्ध कराए। लेकिन बकाया राशि लाखों में पहुंचने के बाद दुकानदारों ने उधार देने से मना कर दिया। अब हालात ऐसे हैं कि कई केंद्रों में अंडा वितरण पूरी तरह बंद हो चुका है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना है कि वे पहले ही आर्थिक दबाव में हैं। कुछ सेविकाएं निजी पैसे से बच्चों को अंडा दे रही थीं, लेकिन अब यह भी संभव नहीं रह गया है।
कुपोषण का खतरा बढ़ा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अंडा प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों का सस्ता और प्रभावी स्रोत है। इसके लंबे समय तक बंद रहने से खासकर कमजोर और कुपोषित बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो जिले में बच्चों के स्वास्थ्य स्तर में गिरावट तय मानी जा रही है।
विभाग का आश्वासन, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस
विभागीय अधिकारी ने बताया कि फंड आवंटन की प्रक्रिया जारी है और जल्द भुगतान किया जाएगा। हालांकि, यह आश्वासन पिछले कई महीनों से दिया जा रहा है, लेकिन स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। आंगनबाड़ी सेविकाओं ने प्रशासन से मांग की है कि बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाए, ताकि बच्चों को मिलने वाला पोषण फिर से शुरू हो सके और योजना पूरी तरह ठप होने से बचाई जा सके।
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