- अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच नई नियुक्ति, जानें कौन हैं अराफी
Samachar Post डेस्क, रांची :मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान की सियासत में बड़ा बदलाव सामने आया है। अली खामेनेई के इजरायली हमले में मारे जाने की खबरों के बाद अली रजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। ईरान में सुप्रीम लीडर का पद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि देश की सर्वोच्च राजनीतिक और सैन्य शक्ति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अली रजा अराफी ईरान की धार्मिक दुनिया का एक बड़ा नाम हैं। वे पहले अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे शियाओं के पवित्र शहर Qom में जुमे की नमाज के इमाम भी रह चुके हैं। अराफी लंबे समय तक देशभर की इस्लामिक सेमिनारियों के प्रमुख पदों पर रहे हैं, जिससे शिया धार्मिक ढांचे में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
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कैसे चुना जाता है सुप्रीम लीडर?
ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की सभा करती है। वहीं गार्जियन काउंसिल उम्मीदवारों की पात्रता पर नजर रखती है। एक बार नियुक्ति होने के बाद सुप्रीम लीडर को ‘अयातुल्लाह’ की उपाधि दी जाती है और यह पद आमतौर पर आजीवन होता है। अराफी इन दोनों संस्थाओं से जुड़े रहे हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत की खबरों के बाद उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। ऐसे में धार्मिक संस्थानों में प्रभाव, प्रशासनिक अनुभव और गार्जियन काउंसिल से करीबी संबंधों के चलते अराफी का नाम सबसे आगे आया। हालांकि, स्थायी नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
क्या स्थायी सुप्रीम लीडर बन सकते हैं?
ईरान की परंपरा के अनुसार कई बार अंतरिम रूप से पद संभालने वाला ही बाद में स्थायी सुप्रीम लीडर बन जाता है। मौजूदा परिस्थितियों में यह संभावना जताई जा रही है कि अराफी को ही स्थायी रूप से यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
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